शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन क्यों नहीं पहनते हैं काले कपड़े, जानिए बड़ा राज

शादी के दौरान दूल्हा-दुल्हन क्यों नहीं पहनते हैं काले कपड़े, जानिए बड़ा राज

शादी हर किसी के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है। हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। हिन्दू विवाह पद्धति में कुछ परंपराएं ऐसी हैं जिनका निर्वाह प्राचीन काल से किया जा रहा है जैसे शादी के समय दूल्हा-दुल्हन को काले कपड़े न पहनने देना।

क्यों नहीं पहनते हैं काले कपड़े:

काला रंग अशुभता का प्रतीक है। काला रंग ओजस्विता कम करता है, अवसादकारक एवं उत्पीड़क बोझ देने वाला है। दुल्हन के लिए बनाए जानी वाली प्रत्येक वस्तु में लाल रंग को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। लाल रंग गर्मजोशी और मनोबल बढ़ाता है साथ ही लाल रंग प्यार, रोमांस और पैशन का प्रतीक माना जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो लाल रंग ऊर्जा का मुख्य स्तोत्र है। जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसके विरुद्ध दूल्हा-दुल्हन के लिए नीले, भूरे और काले रंगों को निषिद्ध किया गया हैं क्योंकि ये रंग नकारात्मकता का प्रतीक हैं।


इनकी फिल्में तो बहुत देखी होंगी, आज जानिए रियल लाइफ 'टार्जन' के बारे में

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नयी दिल्ली: मूवी में तो टार्जन (Tarzan) देखा होगा लेकिन क्या आप रियल लाइफ 'टार्जन' के बारे में जानते हैं जी हां, वियतनाम के जंगलों में रहने वाले रियल लाइफ 'टार्जन' के बारे में जानकारी बहुत दिलचस्प है टार्जन ने अपने जीवन के 40 वर्ष जंगल में ही बिताए जब उसे मुख्याधारा से जोड़ने के लिए शहर ले जाया गया तो कुछ ही वर्षों में उसकी मृत्यु हो गई

इस रियल लाइफ टार्जन का वास्तविक नाम हो वैन लैंग है 1972 में अमेरिका (US) द्वारा की गई बमबारी में लैंग के पूरे परिवार की मृत्यु हो गई थी इसके बाद वे अपने पिता के साथ शहर छोड़कर भाग गए लैंग और उनके पिता जंगल में ही रहने लगे, उन्होंने कभी वापस शहर न लौटने का निर्णय लिया जीवन के 40 साल जंगल में बिताने वाले लैंग को फिल्म निर्माता अल्वारो सेरेजो ने ढूंढ़ निकाला और उन्हें वापस मुख्यधारा में ले जाने का निर्णय लिया  

लैंग को अल्वारो सेरेजो ने 2013 में खोजा इस दौरान जब एक टीम उन्हें वापस शहर ले जाने के लिए पहुंची तब भी वे समझते थे कि वियतनाम युद्ध अभी भी चल रहा है, इसी वजह से वे वापस शहर नहीं आए लेकिन उन्हें समझाया गया कि युद्ध समाप्त हो चुका है, वे वापस शहर चलकर रह सकते हैं इसके बाद वे वापस चलने के लिए तैयार हुए हालांकि हो वैन लैंग को शहर की आबोहवा अधिक समय तक रास नहीं आई  

जंगल में खाते थे ये खाना

हो वान लैंग की सितंबर में 52 साल की आयु में मृत्यु हो गई इसके पीछे माना जाता है कि उन्हें शहर की तनाव भरी जीवन रास नहीं आई वे शहर में आने के बाद कभी-कभी शराब भी पीने लगे थे जंगल में 40 साल बिताने वाले लैंग को शहर का खाना भी रास नहीं आया वे जंगल में फल, छाल और मांस खाते थे लेकिन शहर में प्रोसेस्ड फूड खाना पड़ रहा था जो उनकी बॉडी ने अडॉप्ट नहीं किया अल्वारो सेरेजो ने लैंग का वीडियो शेयर किया है, जो वायरल हो रहा है लोग रियल लाइफ टार्जन को याद कर भावुक हो रहे हैं