यहां भारी पत्थर भी एक किमी तक चलते हैं, अपने पीछे निशान भी छोड़ जाते हैं, जानिए कैसे

यहां भारी पत्थर भी एक किमी तक चलते हैं, अपने पीछे निशान भी छोड़ जाते हैं, जानिए कैसे

आपने कभी किसी पत्थर को चलते हुए देखा है. शायद नहीं, क्योंकि आपको लगता है कि पत्थर तो निर्जीव है, वह कैसे चल सकता है.

आपका सोचना ठीक है, मगर यह भी ठीक है कि कुछ पत्थर चल सकते हैं. अमरीका में एक स्थान ऐसी भी है जहां पत्थर भी चलते हैं. ये चलने वाले पत्थरों के बारे में सालों से कई अध्ययन हुए उसके बावजूद इसके पीछे के राज को पूरी तरह नहीं खोला जा सका. आज भी वैज्ञानिक केवल संभावनाएं बताते हैं.

लोगों का मानना है कि ये विडंबना ही है कि जिस स्थान का नाम डेथ वैली है वहां निर्जीव वस्तु भी चलती है. सालों से इस बात पर लोग अध्ययन कर रहे हैं कि आखिर ये पत्थर अपनी स्थान से कैसे खिसक रहे हैं. पत्थर अपनी पीछे खिसकने का एक लंबा निशान भी छोड़ जाते हैं.

2014 से पहले इन पत्थरों को लेकर बहुत ज्यादा रिसर्च हुई. कुछ वैज्ञानिकों ने तो पत्थरों को नाम देकर उन्हें एक स्थान पर छोड़ा मगर वो जब कुछ वर्षों बाद लौटे तो उन्होंने देखा कि 200 किलो से भी भारी पत्थर अपनी स्थान से खिसककर करीब 1 किलोमीटर दूर पड़ा है. वर्ष 2014 में रिचर्ड डी नॉरिस और उनके भाई जेम्स नॉरिस ने दावा किया कि उन्होंने पत्थरों के राज का पता लगा लिया है.

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उनके मुताबिक ये मूवमेंट ठंड के दिनों में खास तरह के मौसम के दौरान ही होता है. जब सूखी झील पर हल्का पानी होता है और ठंड के दिनों में रात के समय वो पानी जम जाता है तो बर्फ की बहुत ज्यादा पतली चादर बन जाती है. जब धूम निकलती है तो बर्फ के यही टुकड़े छोटे-छोटे पैनल में बंट जाती हैं और हल्के पानी पर फिसलने लगते हैं. इलाके में चलने वाली बहुत ज्यादा तेज हवा से बर्फ के टुकड़े पत्थर को लेकर साथ में खिसकते हैं.

इस कारण से इनके खिसकने के साथ ही पीछे निशान भी छूट जाता है. दोनों भाइयों ने टाइम लैप्स तकनीक का इस्तेमाल कर के इस बात का पता लगाया था जिसका वीडियो यूट्यूब पर उपस्थित है.


घर में रस्सी से लटका मिला व्यक्ति का मृत शरीर, जाँच में जुटी पुलिस

घर में रस्सी से लटका मिला व्यक्ति का मृत शरीर, जाँच में जुटी पुलिस

असम के बक्सा जिले के तामुलपुर क्षेत्र में गांधीबाड़ी चौकी के भीतर द्वारकुची में एक किशोर का मृत शरीर मिलने से टकराव खड़ा हो गया है. दो बच्चों वाले आर्मीमैन बीरेन चंद्र बोरो के निर्माणाधीन कंक्रीट के घर में व्यक्ति का मृत शरीर रस्सी से लटका मिला.

शव की पहचान 22 वर्षीय जियाबुर रहमान के रूप में हुई है. वह मोरीगांव जिले के खारुपथर गांव के रहने वाले थे. लोकल लोगों के मुताबिक जब मृतक के परिजन फोन पर पहुंचे तो पता चला कि मृतक रंगिया इलाके में मजदूरी का कार्य करता था.

तामुलपुर रंगिया से करीब 25 किलोमीटर दूर है. मृत शरीर मिलने पर व्यक्ति के होंठ काले कपड़े में लपेटे हुए थे, जिससे घटना की संभावना जताई जा रही है. लोकल लोगों का मानना ​​है कि यह मर्डर का केस है क्योंकि मकान मालिक की पत्नी ने व्यक्ति को जानने से मना किया है. लोकल लोगों का मानना ​​था कि हो सकता है कि लुटेरों ने उसकी मर्डर करने से पहले उसपर काला कपड़ा डाल दिया हो और उसके शरीर को द्वारकुची के निर्माणाधीन घर पर लटका दिया हो.

मृतक के मृत शरीर को तमुलपुर पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है. पुलिस अब मुद्दे की जाँच कर रही है.