सीएम योगी का बड़ा फैसला - यूपी में सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की परीक्षा स्थगित

सीएम योगी का बड़ा फैसला - यूपी में सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों की परीक्षा स्थगित

लखनऊ: कोरोना महामारी के बीच, उत्तर प्रदेश में शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। इससे पहले गुरुवार को, राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड के 10 वीं 12 वीं बोर्ड और विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की परीक्षाओं को स्थगित करने की घोषणा की । विश्वविद्यालय और कॉलेज की परीक्षाएं 15 मई तक और बोर्ड की परीक्षाएं 20 मई तक टाल दी गई हैं। फिलहाल, परीक्षाओं की नई तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। मई के पहले सप्ताह में परीक्षाओं पर निर्णय लिया जाएगा।

इसके साथ ही राज्य में 12 मई तक स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। इससे पहले राज्य में पंचायत चुनाव के कारण परीक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। इस बार उत्तर प्रदेश की 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 56 लाख से अधिक छात्र उपस्थित होने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार 15 अप्रैल को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। इससे पहले, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक में केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई कक्षा 10 को रद्द करने और कक्षा 12 की परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया था।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर यह जानकारी दी। उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, जो अपनी स्थापना के 100 साल पूरे करने जा रहा है, देश का ही नहीं है। यह दुनिया में शिक्षा का सबसे बड़ा बोर्ड है। यह वर्ष इसका शताब्दी वर्ष भी है। यूपी बोर्ड के वर्तमान स्वरूप की बात करें तो इस बार कई छात्र शैक्षणिक सत्र की बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले हैं। उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की आबादी से अधिक है। इस बार उत्तर प्रदेश की 10 वीं और 12 वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 56 लाख से अधिक छात्र उपस्थित होने वाले हैं। 


कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

लखनऊ: कोविड-19 का कहर तो है ही पर तमाम कोविड-19 संक्रमित मरीज आर्थिक परेशानी की वजह से भी कोविड-19 वायरस का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं. इस कोविड-19 काल में प्रदेश में ऐसे कई केस, कई कहानियों में परिवर्तित हो गए हैं. यदि पढ़ेंगे तो आंखें भर आएंगी. और तब समझ पाएंगे कोविड-19 के हमले का सबसे अधिक प्रभाव किस पर हो रहा है. यह शब्द वो युवा बोलकर चला गया, शब्द हैं पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना. शुक्रवार को कोविड-19 से इस 23 वर्ष के बेटे का मृत्यु हो गया.

बिना पैसों नहीं होगा उपचार :- उन्नाव निवासी रामशंकर के लिए 17 अप्रैल का दिन अच्छा नहीं था. उस दिन के बाद तो घर में सब कुछ समाप्त हो गया. पत्नी जलज और बेटे सुशील (23 वर्ष) कोविड-19 संक्रमित हो गए. पत्नी तो ठीक होने लगी पर जवान बेटा तो बुरे दशा में आा गया. उन्नाव से कानपुर गए कहीं बेड नहीं मिला. तीन दिन बाद बेटे को लेकर लखनऊ आए. यहां एक निजी हॉस्पिटल में बेड मिल गया. डाक्टरों ने पहले अस्सी हजार रुपए जमा कराए. और रोजाना 25 हजार का खर्च बताया. रामशंकर क्या करते जो जमा पूंजी थी वह पहले ही खर्च कर चुके थे. पैसों की और आवश्यकता पड़ी तो बेटी की विवाह के जेवर बेच दिए. रामशंकर को 3.30 लाख रुपए मिले.

आपकी आखें भर आएंगी :- छोटी सी परचून की दुकान से रामशंकर के घर का खर्चा चलता था. उपचार के लिए और पैसे चाहिए थे. अंत में रामशंकर ने अपना पुश्तैनी घर गिरवी रखने का निर्णय किया. हॉस्पिटल में भर्ती बेटे सुशील को जब यह पता चला तो हॉस्पिटल के एक वार्ड ब्वाय के मोबाइल से पिता से बात की. उसने पिता से जो बोला उसे पढ़कर आपकी आखें भर आएंगी.

मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो :- चार मई की शाम को सुशील ने पिता से कहाकि, पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना,और कोविड-19 ने बेटे की छीनीं सांसें मेरे उपचार के लिए मम्मी के जेवर बिक गए. आपके खाते में जो पैसे थे वे भी समाप्त हो गए. मुझे पता चला है कि आप उन्नाव बाई पास वाला घर आप गिरवी रखने जा रहे हैं. मेरा उपचार कराने में सब बरबाद हो जाएगा. पम्मी (बहन) की विवाह कैसे होगी. मैं बचूंगा या नहीं, यह पक्का नहीं है. मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो.’ तीन दिन बाद सुशील ने इस रहती दुनिया को अलविदा कह दिया.

दाह संस्कार कर दिया :- शुक्रवार प्रातः काल सुशील के मृत्यु की समाचार सुन पिता बेहोश होकर गिर पड़े. हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस से बेटे का मृत शरीर आलमबाग शमशान घाट पहुंचा. जहां उसका दाह संस्कार हुआ.


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