UP: काष्ठ उद्योग के व्यापारियों का छलका दर्द, कहा- भुखमरी से पीड़ित है हमारा परिवार! सहायता करो

UP: काष्ठ उद्योग के व्यापारियों का छलका दर्द, कहा- भुखमरी से पीड़ित है हमारा परिवार! सहायता करो

लखनऊ यूपी आरा मशीनों सहित अन्य काष्ठ आधारित उद्योगों (Wood Based Industries Welfare Association) की स्थापना को लेकर हजारों करोड़ का निवेश करने वाले व्यापारियों ने राजधानी लखनऊ (Lucknow) में धरना प्रदर्शन किया काष्ठ आधारित उद्योग कल्याण समिति के बैनर तले व्यापारियों ने मुख्य वन संरक्षक को ज्ञापन सौंप कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए है कारोबारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाते हुए बोला कि हम लोगों ने अपनी जमीनों को बेच कर उद्योग स्थापित किया लेकिन विभाग द्वारा अभी तक इकाई को संचालन करने की अनुमति नहीं मिली है उन्होंने बोला कि हम लोग भुखमरी के कगार पर है वहीं बच्चों की स्कूल फीस भी हम लोग जमा नहीं कर पा रहे है बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर शाम सरकार द्वारा आश्वासन मिलने के बाद धरना कुछ दिनों के लिए स्थागित कर दिया गया है

काष्ठ आधारित उद्योगों की वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कुंवर उमेश सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वन विभाग द्वारा ई-लाटरी की प्रक्रिया अपनाई गई थी इसमें नए काष्ठ आधारित उद्योग की स्थापना और संचालन के लिए लाइसेंस जारी किए गए थे इसके बाद यूपी वन विभाग द्वारा एक मार्च 2019 को सभी लाइसेंस धारकों से फीस जमा कराकर इकाई स्थापना के लिए प्रोविजनल लाइसेंस दिए गए

व्यापारियों ने मुख्य वन संरक्षक को भेजा ज्ञापन

उमेश सिंह ने बताया कि हम सभी लाइसेंस धारकों द्वारा सरकार पर भरोसा जताते हुए उद्योग स्थापित कर लिए लाइसेंस धारकों द्वारा करीब 3000 करोड़ रुपए का निवेश उत्तर प्रदेश में किया जा चुका है इसमें संचालकों द्वारा अपनी जमा पूंजी और अन्य संसाधनों से लेकर उद्योग स्थापित किए गए उन्होंने मुख्य वन संरक्षक के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है और संज्ञान लेने की मांग की है उमेश सिंह ने बोला है कि जब तक लोगों को लाइसेंस की अनुमति नहीं मिल जाती, हम लोगों का अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा

काष्ठ उद्योगों से जुड़े कारोबारियों ने प्रदेश में करीब 3000 करोड़ का निवेश अपनी जमा पूंजी से किया है प्रदेश को निवेश फ्रेंडली बनाने की प्रयास में लगी योगी सरकार उनके निवेश पर भी ध्यान दे और समस्या का जल्द हल कराए


बॉयलर फटने से झुलसे इतने मजदूर, पुलिस के रवैये से ग्रामीणों में नाराजगी; ये है पूरा मामला

बॉयलर फटने से झुलसे इतने मजदूर, पुलिस के रवैये से ग्रामीणों में नाराजगी; ये है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक दर्दनाक घटना हुई। सिखेड़ा थाना क्षेत्र में निराना के जंगल में नाला के पास पुराने टायरों से तेल निकालने के चलाए जा रहे प्लांट में बॉयलर फटने से झुलसे दो मजदूरों की अस्पताल में मौत हो गई।

वहीं पुलिस प्रकरण की जांच के बजाए मजदूरों और फैक्टरी संचालक के बीच हुए समझौता का कागज लिए बैठी रही। मृतक पुरबालियान गांव के रहने वाले थे। पुलिस के रवैये से ग्रामीणों के बीच नाराजगी है। 

निराना के जंगल में गंदे नाले के पास काफी समय से पुराने टायरों से तेल निकालने का प्लांट चलाया जा रहा है। मंसूरपुर के गांव पुरबालियान निवासी 28 वर्षीय प्रदीप पुत्र महेंद्र व 24 वर्षीय मोनू पुत्र मांगा अन्य मजदूरों के साथ प्लांट में काम कर रहे थे। प्रदीप व मोनू शुक्रवार को बॉयलर के बोल्ट खोल रहे थे, इसी बीच बायलर में जोरदार धमाका हुआ और दोनों मजदूर बायलर से निकले मलबे की चपेट में आ गए। इससे दोनों की छाती का हिस्सा बुरी तरह झुलस गया। इस दौरान अन्य सभी मजदूर मौके पर पहुंचे। 

इसके बाद उन्होंने प्लांट मालिक को सूचना दी। मालिक ने मौके पर पहुंच कर मजदूरों की मदद से झुलसे मजदूरों को गंगदासपुर प्राइवेट डॉक्टर के यहां पहुंचाया, लेकिन हालत गंभीर देखकर डॉक्टर ने दोनों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। 

दोनों को मेरठ सुभारती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां मंगलवार को मोनू व बुधवार को प्रदीप की मौत हो गई। दोनों मजदूरों की मौत से परिजनों में रोष है। बताया गया कि गुरुवार को गणमान्य लोगों ने प्लांट मालिक से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिलाकर पीड़ित परिजनों से समझौता करा दिया। उधर, मजदूरों में हादसे के बाद से दहशत है।

पुलिस ने साधी थी चुप्पी
बताया गया कि हादसे की सूचना पुलिस को दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने चुप्पी साध ली थी। गुरुवार को थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस को इस बारे में थाना पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी। डायल 112 को सूचना दी थी।

प्रदूषण विभाग भी चुप
इस हादसे को लेकर प्रदूषण विभाग भी चुप है। जबकि यह प्लांट क्षेत्र में प्रदूषण फैला रहा है।