UP Election 2022: अमित शाह ने कहा- 'यहां बुआ, बबुआ और बहन की दाल नहीं गलेगी'

UP Election 2022: अमित शाह ने कहा- 'यहां बुआ, बबुआ और बहन की दाल नहीं गलेगी'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यूपी में बुआ, बबुआ और बहन की दाल नहीं गलेगी। तीनों मिल जाएं तो भी भाजपा कार्यकर्ताओं का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। सवालिया शैली में लोगों से पूछा कि आपको अखिलेश का ‘निजाम’ चाहिए या योगी का विकास। साथ ही निजाम शब्द को अपने तरीके से परिभाषित किया।

शाह गुरुवार को मुरादाबाद में भाजपा की जन विश्वास रैली को संबोधित कर रहे थे। बुद्धि विहार के मैदान पर आयोजित रैली में उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस पर प्रहार किए लेकिन सबसे ज्यादा हमलावर सपा के प्रति रहे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश पूरा गन्ने का प्रदेश है, लेकिन अखिलेश यादव को गन्ने का नाम भी नहीं मालूम होगा। वह सिर्फ जिन्ना-जिन्ना करते हैं। आपको अखिलेश का ‘निजाम’ चाहिए या योगी का विकास।
गृह मंत्री ने निजाम का अर्थ नसीमुद्दीन, इमरान मसूद, आजम खां, मुख्तार अंसारी बताया। उन्होंने कहा कि आपको याद है न कि रामभक्तों पर गोली किसने चलाई थी, सपा ने चलाई थी। ये हाथी और साइकिल वालों ने भ्रष्टाचार के नोटों से बोरे भरने के अलावा कोई काम नहीं किया। जब लड़कियों से दुष्कर्म होता था, तो ये कौन कहता था कि लड़कों से गलती हो जाती है। ये सोच थी समाजवादियों की, अगर बहन-बेटियों की सुरक्षा है तो वह भाजपा में है।
आज दंगा करने वालों की आंख उठाने की हिम्मत नहीं
उन्होंने आगे कहा कि आज भाजपा की सरकार है तो दंगा करने वालों की आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं है। सपा सरकार में 700 दंगे हुए। पलायन कराने वाले अब खुद पलायन कर गए या जेल में बंद हैं। विकास का काम भाजपा ने किया है। यूपी में बुआ, बबुआ और बहन की दाल नहीं गलेगी। बहन शब्द के नए प्रयोग पर अमित शाह ने पूछा, आप समझ गए कि मैं किसकी बात कर रहा हूं। इस पर भीड़ के बीच से प्रियंका गांधी बोले जाने पर उन्होंने इशारों में हामी भर दी। गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता विजय तब ही मनाएगा, जब हम 300 पार कर लेंगे।
सपा ने खोल रखी थी अपनी ‘लैब’: शाह
जन विश्वास रैली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निशाने पर अखिलेश यादव और उनकी पार्टी रही। शाह ने कहा कि सपा ने अपने शासनकाल में एक अलग ही लैब खोल रखी थी। उन्होंने जनता को लैब का अर्थ समझाते हुए कहा कि पहले अक्षर एल का अर्थ था लूट। इन्होंने खूब लूटपाट की और अपनी जेबें भरीं। उन्होंने ए का अर्थ आतंकवाद बताया। कहा कि आप के पड़ोस के जिले में बबुआ के चच्चा जान रहते थे, जिन्होंने आतंकवाद के दम पर लोगों की जमीनों पर कब्जा किया, जो कि अब जेल में चक्की पीस रहे हैं। बी का मतलब भाई-भतीजावाद है। सपा शासन में केवल भाई भतीजावाद ही चलता है। इनके विधायक, मंत्री और नेताओं ने लोगों की जिंदगी नर्क बना दी थी। भाजपा सरकार आने के बाद जनता खुश है। जनता की मांग है कि फिर से भाजपा सरकार आए।

मुरादाबाद की सभी सीटों पर खिलाना है कमल : डिप्टी सीएम मौर्य
जन विश्वास रैली में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुरादाबाद जिले की सभी छह सीटों पर इस बार कमल खिलाना है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जिस तरह सभास्थल भीड़ से खचाखच भरा नजर आ रहा है, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में ईवीएम से ऐसे ही वोट निकलने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा को मुरादाबाद से दो सीटें ही मिली थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। जनपद में भी सभी सीटें जीतेंगे। हर सीट पर कमल खिलेगा। सपा, बसपा और कांग्रेस सभी मिलकर भी आए, तब भी भाजपा का मुकाबला नहीं कर पाएंगे।


UP Police Constable Recruitment 2021: भर्ती प्रक्रिया के नियमों में बदलाव की ख़बरें

UP Police Constable Recruitment 2021: भर्ती प्रक्रिया के नियमों में बदलाव की ख़बरें

उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग में महिला/पुरुष कॉन्स्टेबल के 25,000 पदों पर भर्ती निकाले जाने की तैयारी चल रही है. यूपीपीबीपीबी द्वारा इसका खाका भी खींचा जा चुका है. इन दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड के जरिए इस भर्ती प्रक्रिया के नियमों में कई तरह के बदलाव किए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं.

हालांकि अभी इन बातों की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है इसीलिए सिपाही भर्ती की चयन प्रक्रिया पूर्व में समापन हुई आरक्षी भर्ती की नियमावली पर ही आधारित मानी जाएगी. मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, इस भर्ती का ब्लू प्रिन्ट प्रदेश सरकार को भेज दिया गया है. प्रदेश सरकार की ओर से स्वीकृति मिलते ही इस भर्ती की आवेदन प्रक्रिया शुरु की जा सकती है. अनुमान लगाया जा रहा है कि दिसंबर माह के अंत तक इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा. ऐसे में इन पदों पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को समय-समय पर यूपीपीआरपीबी की वेबसाइट पर विज़िट करते रहना चाहिए. साथ ही यदि अभ्यर्थी  सरकारी जॉब के लिए किसी प्रतियोगी इम्तिहान की तैयारी कर रहे हैं तो वो करेंट अफेयर्स की कंप्लीट तैयारी के लिए सफलता डॉट कॉम के जरिए चलाए जा रहे की सहायता ले सकते हैं.       
क्या होती है आरक्षी भर्ती की चयन प्रक्रिया    
 यूपीपीआरपीबी के जरिए अब तक समापन कराई जा चुकी सिपाही भर्ती के आधार पर यह बोला जा सकता है कि इस भर्ती में आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को चार चरणों से होकर गुजरना पड़ता है. इसमें सबसे पहले उम्मीदवारों को लिखित इम्तिहान देनी होती है. इसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा, शारीरिक मापदंड, और मेडिकल परीक्षण को पार करना होगा. इन सभी चरणों में पास होने वाले उम्मीदवारों की आखिरी योग्यता सूची तैयार की जाती है. 
न्यूनतम योग्यता 
यूपी पुलिस में कॉन्स्टेबल बनने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम बारहवीं पास होने जरूरी होता है. 12वीं में मैथ्स, आर्ट्स, साइंस सभी स्ट्रीम से पढ़ाई करने वाले कैंडिडेट्स को समान वरीयता दी जाती है. कई प्रतियोगी उम्मीदवारों का मानना है कि जल्द ही 25,000 पदों पर निकाली जाने वाली इस कॉन्स्टेबल भर्ती में आवेदन करने के लिए न्यूनतम योग्यता को कम किया जा रहा है. हालांकि इस विषय में अभी तक कोई की ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में उम्मीदवारों को भर्ती के नोटिफिकेशन जारी किए जाने तक इन्तजार करना होगा.  

सिपाही भर्ती की कितनी होती है आयुसीमा
उत्तर प्रदेश में आरक्षी के पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को न्यूनतम आयु 18 साल होनी चाहिए. इसके अतिरिक्त कॉन्स्टेबल पदों पर केवल 22 साल की अधिकतम आयुसीमा वाले अभ्यर्थियों को ही शामिल होने का मौका दिया जाता है. पुलिस विभाग में बहुत ज्यादा लंबे समय से आरक्षी के पदों पर भर्ती नहीं निकाली गई है. ऐसे में उम्मीदवारों द्वारा यह आशा लगाई जा रही है कि आनें वाले भर्ती में आयुसीमा में बढ़ोत्तरी की जा सकती है. हालांकि इस बारे में अभी तक ऐसी कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. इसलिए कैंडिडेट्स को कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए जरिए किए जाने वाले नोटिफिकेशन का इन्तजार करना होगा. 
कॉन्स्टेबल को मिलने वाला मासिक वेतन और अन्य भत्ते
यूपी पुलिस में कांस्टेबल पदों पर आखिरी रूप से चयनित होने वाले अभ्यर्थी को लगभग 30 हज़ार से 40 हज़ार रुपये प्रतिमाह का अनुमानित मासिक वेतन प्राप्त होता है. जिसमें 7वें पे-कमीशन के मुताबिक अन्य भत्ते जैसे यात्रा किराया भत्ता, मकान किराया भत्ता, मेडिकल सुविधा आदि जैसी सुविधाएं शामिल हैं. जो इसे एक बहुत सुन्दर सरकारी जॉब बनाते हैं.
किस तरह से होती है वेतन में वृद्धि 
यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल के पदों पर निकाली जाने वाली भर्ती में चयनित होने वाले उम्मीदवारों की लगभग 2 सालों की ट्रेनिंग कराई जाती है. प्रशिक्षण के दौरान कैंडिडेट्स को 21,700 रुपये का पारिश्रमिक दिया जाता है. ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उम्मीदवारों को करीब 6 माह तक अंडर ट्रेनिंग में रखा जाता है लेकिन इस समयसीमा में उन्हें तैनाती दे दी जाती है. छ: माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अभ्यर्थी को मकान किराया भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सुविधाओं का फायदा दे दिया जाता है. 
कैसे करें सरकारी जॉब के एग्जाम की पक्की तैयारी  
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