गजब, बरेली में एक शख्स को अपने पालतू कुत्ते से इतना प्यार कि उसका ध्यान रखने के लिए छोड़ दी शराब

गजब, बरेली में एक शख्स को अपने पालतू कुत्ते से इतना प्यार कि उसका ध्यान रखने के लिए छोड़ दी शराब

नशा शराब का हो या फिर कोई और... जिंदगी के लिए नासूर से कम नहीं है। जिले में ही कई नशे के आदी अपनी जान भी गवां चुके हैं। जिला अस्पताल में बने मन कक्ष में कोरोना काल के दौरान मई महीने में ही करीब 24 केस काउंसिलिंग और सलाह लेने के लिए आ चुके हैं। मन कक्ष के इंचार्ज डॉ.आशीष कुमार बताते हैं कि ठीक समय पर अगर नशे के लती की काउंसिलिंग हो तो उसे नशे के दलदल से निकाला जा सकता है। इसे मोटिवेशन इनहेसमेंट थेरेपी (एमआइटी) कहते हैं। मन कक्ष में भी अब तक 70 से 80 फीसद मरीज दृढ़ इच्छाशक्ति और एमआइटी के जरिए नशे के चंगुल से छूट चुके हैं।

शहर के कोहाड़ापीर निवासी युवक सालों से शराब का लती था। काफी कोशिश के बावजूद वह शराब नहीं छोड़ पा रहा था। स्वजन उसे उपचार के लिए नशा मुक्ति केंद्र ले गए। यहां काउंसिलिंग के दौरान पता चला कि युवक अपने कुत्ते को काफी प्यार करता है। डॉक्टर ने इसी बात को युवक के नशे से जोड़कर शराब के नुकसान बताए। कहा कि युवक के नशे में होने पर किस तरह उसके कुत्ते की देखभाल नहीं हो पाती। इसके बाद युवक ने नशा छोड़ दिया।

खुद बढ़ाया हौसला और छूट गया नशा : सिविल लाइंस निवासी एक शख्स को अफीम के नशे की लत लग गई थी। नशा न मिलने पर उसका व्यवहार बदल जाता। आए दिन झगड़ा होने लगा। धीरे-धीरे परिवार के लोग उससे कटने लगे। इससे युवक और ज्यादा नशा करने लगा। एक दिन युवक खुद जिला अस्पताल के मन कक्ष पहुंचा। यहां उसकी काउंसिलिंग शुरू हुई। धीरे-धीरे कुछ शारीरिक परेशानी का सामना युवक ने किया लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर नशामुक्त हो गया। 

उस गली और परिचित को छोड़ें जो नशे का आदी हो : मन कक्ष की क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट खुशअदा बताती हैं कि लोगों के नशे का आदी होने की कई वजह हैं। इसमें पारिवारिक कलह सबसे बड़ा लक्षण है। इसके अलावा नई उम्र में गलत संगत की वजह से भी लोग नशा करने लगते हैं। खास बात कि नशा छोड़ने में भी यही सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। ऐसे में जरूरी है कि जहां नशा होता हो, उस जगह और परिचित को छोड़ दें।

छोड़ते समय कुछ परेशानी, लेकिन रहें मजबूत : विशेषज्ञ बताते हैं कि शराब, अफीम, गांजा या कोई भी नशा छोड़ते समय शुरूआत में कुछ दिन शारीरिक और मानसिक परेशानी हो सकती है। शारीरिक दिक्कतों में मिर्गी का दौरा, कान में आवाज आना, हाथों में कंपकंपाहट जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। लेकिन सप्ताह भर के अंदर ये दिक्कत धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। ऐसे में केवल शुरूआती मजबूती के बाद नशे से छुटकारा पाया जा सकता है।


बसपा की प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी की सफलता से मायावती प्रसन्न, बोलीं...

बसपा की प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी की सफलता से मायावती प्रसन्न, बोलीं...

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 में प्रदेश के 13 प्रतिशत ब्राह्मणों को जोड़ने के प्रयास में बहुजन समाज पार्टी की 23 जुलाई से चल रही प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी की सफलता पर पार्टी की मुखिया मायावती ने काफी प्रसन्नता व्यक्त की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के अन्य दलों पर तंज भी कसा है। बसपा मुखिया मायावती ने इसको लेकर मंगलवार को दो ट्वीट भी किया है।

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान इंटरनेट मीडिया पर बेहद एक्टिव होने वाली उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि मेरे निर्देशन में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तथा राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा ने उत्तर प्रदेश में 23 जुलाई से प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी प्रारंभ की है जो कि ब्राह्मण सम्मेलन के नाम से काफी चर्चा में है। मायावती ने कहा कि इसके प्रति प्रदेश में उत्साहपूर्ण भागीदारी यह प्रमाण है कि इनका बीएसपी पर सजग विश्वास है। जिसके लिए सभी का दिल से आभार।

मायावती ने कहा कि अयोध्या से 23 जुलाई को श्रीरामलला के दर्शन से शुरू हुआ प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी का यह कारवां अम्बेडकरनगर व प्रयागराज जिलों से होता हुआ प्रदेश में लगातार सफलतापूर्वक आगे बढ़ता जा रहा है। प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी से विरोधी पाॢटयों की नींद उड़ गई है। इसको रोकने के लिए अब यह सभी पाॢटयां प्रदेश में किस्म-किस्म के हथकण्डे अपना रही हैं। इनसे सावधान रहें।


बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि हमारी पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन में दिखने लगा है कि प्रबुद्ध वर्ग का बसपा पर सजग विश्वास है।