कोविद -19: केंद्र ने यूपी सरकार से आईसीयू बेड, एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने के लिए कहा...

कोविद -19: केंद्र ने यूपी सरकार से आईसीयू बेड, एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने के लिए कहा...

लखनऊ / नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को कोविद -19 के मामलों का जल्द पता लगाने और राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए अलगाव, ऑक्सीजन, आईसीयू बेड और एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने और मृत्यु दर को कम करने का सुझाव दिया ।

केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के साथ उत्तर प्रदेश में कोविद -19 की स्थिति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की और गैर-जरूरी यात्रा के लिए सख्त और प्रभावी पालन पर जोर दिया और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ को रोकने पर जोर दिया। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के साथ महाराष्ट्र ऐसे राज्य हैं जहां एक लाख से अधिक उपचाराधीन मरीज हैं। राज्य में बड़ी संख्या में कोविद -19 संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं और मौतें भी हो रही हैं।

उत्तर प्रदेश में, कोरोना वायरस के नए मामलों की वृद्धि दर 19.25 प्रतिशत बताई गई है। उत्तर प्रदेश में, पिछले 30 दिनों में कोरोना मामलों के मामले में 46 जिलों ने अपने उच्चतम स्तर को पार कर लिया है। इन जिलों में, लखनऊ, कानपुर, बनारस और प्रयागराज सबसे अधिक प्रभावित जिले हैं। इसमें कहा गया है कि 17-23 मार्च 2021 के सप्ताह की तुलना में, 7-13 अप्रैल 2021 को समाप्त सप्ताह के लिए आरटी-पीसीआर परीक्षण घटकर 46 प्रतिशत (48 प्रतिशत से) हो गया है, जबकि प्रतिजन परीक्षण बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है (से) 51 प्रतिशत)। हो गया।

बैठक के दौरान, अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी की रिपोर्ट पर भी चर्चा की गई, जिसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन युक्त बेड, आईसीयू आदि शामिल थे। इसके कारण लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। राज्यों को कोविद -19 के मामलों का जल्द पता लगाने और राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए अलगाव, ऑक्सीजन, आईसीयू बेड और एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने और मृत्यु दर को कम करने का सुझाव दिया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि राज्यों को 10 लीटर और 45 लीटर के सिलेंडर सहित ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग है और अतिरिक्त वेंटिलेटर प्रदान करने का उनका अनुरोध जल्द ही पूरा किया जाएगा।


कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

कोविड-19 का कहर : मैं बचूंगा या नहीं घर गिरवी न रखना पापा, और उसने दुनिया को अलविदा कह दिया

लखनऊ: कोविड-19 का कहर तो है ही पर तमाम कोविड-19 संक्रमित मरीज आर्थिक परेशानी की वजह से भी कोविड-19 वायरस का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं. इस कोविड-19 काल में प्रदेश में ऐसे कई केस, कई कहानियों में परिवर्तित हो गए हैं. यदि पढ़ेंगे तो आंखें भर आएंगी. और तब समझ पाएंगे कोविड-19 के हमले का सबसे अधिक प्रभाव किस पर हो रहा है. यह शब्द वो युवा बोलकर चला गया, शब्द हैं पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना. शुक्रवार को कोविड-19 से इस 23 वर्ष के बेटे का मृत्यु हो गया.

बिना पैसों नहीं होगा उपचार :- उन्नाव निवासी रामशंकर के लिए 17 अप्रैल का दिन अच्छा नहीं था. उस दिन के बाद तो घर में सब कुछ समाप्त हो गया. पत्नी जलज और बेटे सुशील (23 वर्ष) कोविड-19 संक्रमित हो गए. पत्नी तो ठीक होने लगी पर जवान बेटा तो बुरे दशा में आा गया. उन्नाव से कानपुर गए कहीं बेड नहीं मिला. तीन दिन बाद बेटे को लेकर लखनऊ आए. यहां एक निजी हॉस्पिटल में बेड मिल गया. डाक्टरों ने पहले अस्सी हजार रुपए जमा कराए. और रोजाना 25 हजार का खर्च बताया. रामशंकर क्या करते जो जमा पूंजी थी वह पहले ही खर्च कर चुके थे. पैसों की और आवश्यकता पड़ी तो बेटी की विवाह के जेवर बेच दिए. रामशंकर को 3.30 लाख रुपए मिले.

आपकी आखें भर आएंगी :- छोटी सी परचून की दुकान से रामशंकर के घर का खर्चा चलता था. उपचार के लिए और पैसे चाहिए थे. अंत में रामशंकर ने अपना पुश्तैनी घर गिरवी रखने का निर्णय किया. हॉस्पिटल में भर्ती बेटे सुशील को जब यह पता चला तो हॉस्पिटल के एक वार्ड ब्वाय के मोबाइल से पिता से बात की. उसने पिता से जो बोला उसे पढ़कर आपकी आखें भर आएंगी.

मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो :- चार मई की शाम को सुशील ने पिता से कहाकि, पापा! मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो, घर गिरवी न रखना,और कोविड-19 ने बेटे की छीनीं सांसें मेरे उपचार के लिए मम्मी के जेवर बिक गए. आपके खाते में जो पैसे थे वे भी समाप्त हो गए. मुझे पता चला है कि आप उन्नाव बाई पास वाला घर आप गिरवी रखने जा रहे हैं. मेरा उपचार कराने में सब बरबाद हो जाएगा. पम्मी (बहन) की विवाह कैसे होगी. मैं बचूंगा या नहीं, यह पक्का नहीं है. मुझे भगवान भरोसे छोड़ दो.’ तीन दिन बाद सुशील ने इस रहती दुनिया को अलविदा कह दिया.

दाह संस्कार कर दिया :- शुक्रवार प्रातः काल सुशील के मृत्यु की समाचार सुन पिता बेहोश होकर गिर पड़े. हॉस्पिटल प्रशासन की तरफ से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस से बेटे का मृत शरीर आलमबाग शमशान घाट पहुंचा. जहां उसका दाह संस्कार हुआ.


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