समय के साथ बदलाव जरूरी : विजेता योगेंद्र यादव

समय के साथ बदलाव जरूरी :  विजेता योगेंद्र यादव

झांसी राष्ट्र को सुरक्षित रखने के लिए सैनिक अपनी जान जोखिम में डालते हैं उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्र और गवर्नमेंट द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाता है ऐसा ही एक सम्मान है परमवीर चक्र राष्ट्र में अभी तक कुल 21 सैनिकों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया जा चुका है इन सभी सैनिकों की शौर्य गाथा अपने आप में अनोखी है इन 21 परमवीर चक्र विजेता सैनिकों की बहादुरी की कहानियों को राष्ट्र भर की 21 लेखिकाओं ने एक पुस्तक में प्रकाशित किया है इस पुस्तक का संपादन झांसी की रहने वाली कुंती हरिराम द्वारा किया गया है

‘परमवीर चक्र विजेताओं की गाथाएं’ नाम की इस पुस्तक का विमोचन सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र पदक प्राप्त करने वाले कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव द्वारा किया गया कार्यक्रम के दौरान NEWS 18 LOCAL ने उनसे खास वार्ता की

परमवीर चक्र विजेताओं से मिलेगी युवाओं को प्रेरणा
परमवीर चक्र विजेताओं के जीवन पर लिखी पुस्तक के बारे में कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने बोला कि यह एक अद्भुत पुस्तक है जिसे राष्ट्र की 21 लेखिकाओं ने लिखा है इन सभी लेखिकाओं ने परमवीर चक्र विजेताओं की कहानियों को एक सुंदर रूप दिया है युवा जब इस पुस्तक को पढ़ेंगे तो उन्हें प्रेरणा मिलेगी युवाओं के जज्बे पर कैप्टन यादव ने बोला कि आज के युवाओं में राष्ट्र के प्रति जज्बे की कोई कमी नहीं है देशभक्ति की भावना उनके अंदर कूट-कूट कर भरी है बस आवश्यकता है कुछ समय समय पर युवाओं को ठीक दिशा देने की ऐसी पुस्तकें युवाओं को एक सकारात्मक दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देगी

अग्निवीर योजना पर अभी कुछ भी बोलना जल्दबाजी
19 साल की उम्र में परमवीर चक्र अपने नाम करने वाले योगेंद्र यादव से जब हमने अग्निवीर योजना के बारे में प्रश्न पूछा तो उन्होंने बोला कि समय के साथ परिवर्तन होने महत्वपूर्ण हैं हालांकि यह योजना कितनी अच्छी होगी इस पर अभी कुछ बोला नहीं जा सकता इसके रिज़ल्ट का हम सबको इन्तजार करना होगा झांसी आने के अपने अनुभव के बारे में बोला कि झांसी वीरों की धरती है और यहां पर आना अपने आप में एक अनोखा पल होता है लक्ष्मी बाई की शौर्य गाथा है हम सभी को लगातार प्रेरित करती रहती है