Year Ender 2021: ओलंपिक में भारतीय एथलीटों का बढ़िया प्रदर्शन, जानिए पांच ऐतिहासिक पल

Year Ender 2021: ओलंपिक में भारतीय एथलीटों का बढ़िया प्रदर्शन, जानिए पांच ऐतिहासिक पल

खेलों के लिहाज से हिंदुस्तान के लिए वर्ष 2021 बेहतरीन रहा. ओलंपिक में भारतीय एथलीटों ने बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया. जैवलीन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने हिंदुस्तान के 121 वर्ष के ओलंपिक इतिहास में ट्रैक एंड फील्ड में पहला मेडल जीता और वह भी गोल्ड के रूप में.

इसके अतिरिक्त पुरुष हॉकी हो या महिला हॉकी दोनों में ही टीमों ने इतिहास रचा. इन कामयाबियों ने भारतीय फैंस को न केवल खुशी दी, बल्कि कई मौकों पर रुला दिया. नीरज के गोल्ड जीतने के बाद पोडियम पर जब भारतीय झण्डा लहराया और राष्ट्रगान बजा, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया. हम आपको खेलों में ऐसे ही पांच इमोशनल मोमेंट के बारे में बात कर रहे हैं
1. टीम इंडिया ने गाबा का घमंड तोड़ा

2. मीराबाई चानू ने ओलंपिक की बेहतरीन आरंभ की

पिछले दो ओलंपिक से भारतीय दल कुछ खास नहीं कर पाई थी. 2012 ओलंपिक में हिंदुस्तान ने कुल तीन मेडल और 2016 में केवल दो मेडल जीते थे. इस बार भी फैंस कोई खास आशा लगाए नहीं बैठे थे. ओलंपिक की आरंभ हुई और पहले दिन ही वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने हिंदुस्तान को सिल्वर मेडल दिलाया. इस धमाकेदार आरंभ ने फैंस के मन में आशा जगा दी. मीराबाई ओलंपिक में मेडल जीतने वाली हिंदुस्तान की दूसरी महिला वेटलिफ्टर बनीं. इससे पहले वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने हिंदुस्तान को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था. मीराबाई ने जिस समय सिल्वर जीता था, उस समय लाखों हिंदुस्तानियों के फैंस आंसू से भर गए थे. यह जीत की खुशी के आंसू थे.
3. महिला हॉकी में देश की बेटियों ने लहराया परचम

मेडल नहीं जीत पाने के बाद भारतीय खिलाड़ी इमोशनल हो गईं. - फोटो : सोशल मीडिया
टोक्यो ओलंपिक में पहुंचने से पहले महिला हॉकी में टीम इंडिया का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. ओलंपिक में जब टीम मैदान में उतरी तो किसी को आशा नहीं थी कि देश की बेटियां इतिहास रच देंगी. भारतीय महिला टीम को पूल-ए में नीदरलैंड्स, जर्मनी, ब्रिटेन, आयरलैंड और साउथ अफ्रीका के साथ रखा गया था. हिंदुस्तान अपने ग्रुप में दो जीत और तीन हार के साथ चौथे जगह पर रहा था.

टोक्यो में भारतीय महिला टीम का अभियान नीदरलैंड, जर्मनी और डिफेंडिंग चैंपियन ब्रिटेन से लगातार तीन मैचों में हार से प्रारम्भ हुआ. हालांकि टीम ने बहुत बढ़िया वापसी करते हुए अपने से ऊपर रैंकिंग वाली आयरलैंड टीम को 1-0 से हराया. इसके बाद साउथ अफ्रीका को 4-3 से शिकस्त दी. भारतीय टीम की क्वार्टर फाइनल में स्थान पूल-ए के अंतिम मैच में आयरलैंड को 2-0 से हराने के बाद तय हुई.

इसके बाद क्वार्टर फाइनल में तीन बार की ओलिंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हरा दिया. भारतीय महिला टीम इस जीत के साथ पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में स्थान बनाने में सफल हो पाई थी. इस जीत ने हॉकी के प्रति हिंदुस्तान के नजरिए को बदल दिया. टीम में शामिल ज्यादातर खिलाड़ी गरीब परिवार से थे. तैयारियों के लिए संसाधन न होने के बावजूद ओलंपिक में परफॉर्म करना बड़ी बात थी. टीम इंडिया की जीत ने हर फैंस का दिल खुशी से भर दिया. सेमीफाइनल में हालांकि टीम को अर्जेंटीना के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा. तब भी टीम के पास कांस्य पदक की आस बाकी थी. 

ब्रॉन्ज मेडल मैच में भी टीम इंडिया को ग्रेट ब्रिटेन के हाथों हार का सामना करना पड़ा. ओलंपिक मेडल चूकने के बाद टीम इंडिया के प्लेयर्स मैदान पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं. सविता पूनिया, वंदना कटारिया, कैप्टन रानी रामपाल और नेहा गोयल समेत तमाम खिलाड़ी इमोशनल हो गए. इन सभी खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट गजब का प्रदर्शन किया था. अहम मैच में इतना अच्छा खेलने के बावजूद हारने से फैंस का भी दिल टूटा था और उनकी आंखों में भी आंसू थे. भारतीय महिला हॉकी टीम के दबदबे के बारे में आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ब्रिटिश खिलाड़ियों ने भारतीय खिलाड़ियों के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं.
4. भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने 41 वर्ष बाद जीता मेडल 

ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारतीय पुरुष हॉकी टीम - फोटो : pti
महिलाएं एकतरफ मेडल जीतने से चूक गईं, वहीं पुरुष हॉकी टीम ने मेडल जीतकर वर्ष 2021 को यादगार बना दिया. टोक्यो ओलंपिक खेलों में पुरुष हॉकी टीमों ने प्रेरणादायक प्रदर्शन कर इतिहास रचा, जिसे युगों तक याद रखा जाएगा. पुरुष टीम ने ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर पदक के चार दशकों के सूखे को समाप्त किया. भारतीय पुरुष टीम खेल में पदक के 41 वर्ष के लंबे इन्तजार को खत्म करके अपने गौरवशाली अतीत को फिर से याद किया और एक नयी प्रातः काल की आरंभ की.

ओलंपिक में हिंदुस्तान के यात्रा को याद करें तो उसने न्यूजीलैंड के विरूद्ध अपना पहला मुकाबला 3-2 से जीता. हालांकि इसके बाद दूसरे मैच में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों 1-7 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने जोरदार वापसी की और फिर स्पेन को 3-0, अर्जेंटीना को 3-1 और जापान को 5-3 से हराया. इस के साथ भारतीय टीम ग्रुप-ए में पांच में से चार मुकाबले जीतकर दूसरे जगह पर रही.

मनप्रीत सिंह की प्रतिनिधित्व में टीम ने क्वार्टरफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को एकतरफा मुकाबले में 3-1 से पटखनी दी. इस जीत के साथ ही भारतीय टीम 49 वर्ष बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने में पास रही. सेमीफाइनल में पुरुष हॉकी टीम को बेल्जियम से 5-2 से हार मिली. इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए मैच में हिंदुस्तान ने ग्रेट ब्रिटेन को 5-4 से हराकर इतिहास रचा. 

टीम ने 41 वर्ष के सूखे को समाप्त करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता. ओलंपिक में हिंदुस्तान की हॉकी टीम को अंतिम पदक 1980 में मॉस्को में मिला था, जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था. हिंदुस्तान ने ओलंपिक में सबसे अधिक मेडल पुरुष हॉकी में जीते हैं. टीम ने 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980 ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था. इसके अतिरिक्त 1960 में सिल्वर और 1968, 1972 और टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है. भारतीय हॉकी में हुए इस कमाल ने हर किसी को इमोशनल कर दिया था. 
5. नीरज चोपड़ा का टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना

वर्ष 2021 में भी कोविड-19 ने लोगों के अंदर अपना खौफ बनाए रखा. टोक्यो ओलंपिक के सफलतापूर्वक आयोजन से पहले कई बार विरोध हुआ. लोग नहीं चाहते थे कि खेलों के इस महाकुंभ का आयोजन टोक्यो में हो. फिर भी अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक महासंघ ने कोविड-19 के बीच रिस्क लेते हुए इसका सफलतापूर्वक आयोजन किया. ओलंपिक के अंतिम दिन से एक दिन पहले यानी 7 अगस्त को हिंदुस्तान का अंतिम इवेंट था. 

जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा मैदान में थे. भारतीय फैंस को उनसे बहुत उम्मीदें थीं और नीरज ने किसी को निराश भी नहीं किया. उन्होंने फाइनल में 87.58 मीटर तक भाला फेंककर हिंदुस्तान को गोल्ड मेडल दिला दिया. इस जीत के साथ ही हिंदुस्तान ने खेल जगत में नया इतिहास लिखा. ट्रैक एंड फील्ड में हिंदुस्तान का यह पहला ओलंपिक मेडल था. इसके साथ ही 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद हिंदुस्तान का पहला गोल्ड मेडल रहा. 2008 में हमने शूटिंग में गोल्ड (अभिनव बिंद्रा) जीता था. 

ओलंपिक के समाप्त होने के बाद विश्व एथलेटिक्स ने ऐसे 10 बहुत बढ़िया पलों की सूची जारी की, जिसमें उन्होंने नीरज चोपड़ा के द्वारा जैवलिन में गोल्ड मेडल जीतने वाले पल को भी स्थान दी गई. पोडियम पर जब नीरज पहुंचे और राष्ट्रगान बजा तो सभी हिंदुस्तानियों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. ओलंपिक में राष्ट्रगान केवल पहले जगह पर आने वाले एथलीट के लिए ही बजता है. इसे सुनकर भारतीय फैंस इमोशनल भी हुए.
इसके अतिरिक्त पीवी सिंधु का लगातार दूसरी बार मेडल जीतना भी किसी बड़ी जीत से कम नहीं था. 2016 रियो ओलंपिक में सिंधु ने सिल्वर जीता था. वहीं, इस वर्ष वह ब्रॉन्ज जीतने में सफल हो पाईं. उनकी जीत ने हिंदुस्तानियों को इमोशनल किया था. इस वर्ष ऐसे कई मौके आए जब भारतीय खिलाड़ियों ने जीतने का कारनामा किया और फैंस का दिल खुशी से भर दिया. भले ही कोविड-19 ने लोगों को दुखी किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन ने मुश्किल के समय करोड़ों भारतीय फैंस को राहत दी. 
वर्ष की आरंभ भारतीय फैंस के लिए बहुत बढ़िया अंदाज में हुई. जनवरी में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर थी. इस दौरे पर टीम इंडिया पहला टेस्ट बुरी तरह से हारी थी. इसके बाद जो कहानी भारतीय क्रिकेट टीम ने लिखी, वह देखने लायक थी. हिंदुस्तान ने मेलबर्न टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को हराकर सीरीज एक-एक से बराबर कर दिया था. इसके बाद टीम को सिडनी में खेलना था. सिडनी में टीम इंडिया पर हार का खतरा था. लेकिन फिर ऑस्ट्रेलिया और जीत के सामने चेतेश्वर पुजारा दीवार बनकर खड़े हो गए. 

इसके बाद ऋषभ पंत की आक्रामक बल्लेबाजी और हनुमा विहारी-रविचंद्रन अश्विन के दृढ़ संकल्प ने ऑस्ट्रेलिया को जीत से दूर कर दिया. टीम इंडिया ने यह मैच ड्रॉ कराया. फिर टीम गाबा (ब्रिस्बेन) पहुंची, जहां ऑस्ट्रेलियाई टीम 36 वर्ष से नहीं हारी थी. भारतीय टीम ने गाबा का गुरूर तोड़ा और ऑस्ट्रेलिया को 3 विकेट से हराया और चार मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से जीती. इसके बाद भारतीय खिलाड़ी मैदान के चारों ओर तिरंगे को लहराते रहे. यह पल देखने लायक था और फैंस इमोशनल हो गए थे.
पिछले दो ओलंपिक से भारतीय दल कुछ खास नहीं कर पाई थी. 2012 ओलंपिक में हिंदुस्तान ने कुल तीन मेडल और 2016 में केवल दो मेडल जीते थे. इस बार भी फैंस कोई खास आशा लगाए नहीं बैठे थे. ओलंपिक की आरंभ हुई और पहले दिन ही वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने हिंदुस्तान को सिल्वर मेडल दिलाया. इस धमाकेदार आरंभ ने फैंस के मन में आशा जगा दी. मीराबाई ओलंपिक में मेडल जीतने वाली हिंदुस्तान की दूसरी महिला वेटलिफ्टर बनीं. इससे पहले वर्ष 2000 में सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने हिंदुस्तान को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था. मीराबाई ने जिस समय सिल्वर जीता था, उस समय लाखों हिंदुस्तानियों के फैंस आंसू से भर गए थे. यह जीत की खुशी के आंसू थे.
टोक्यो ओलंपिक में पहुंचने से पहले महिला हॉकी में टीम इंडिया का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. ओलंपिक में जब टीम मैदान में उतरी तो किसी को आशा नहीं थी कि देश की बेटियां इतिहास रच देंगी. भारतीय महिला टीम को पूल-ए में नीदरलैंड्स, जर्मनी, ब्रिटेन, आयरलैंड और साउथ अफ्रीका के साथ रखा गया था. हिंदुस्तान अपने ग्रुप में दो जीत और तीन हार के साथ चौथे जगह पर रहा था.

टोक्यो में भारतीय महिला टीम का अभियान नीदरलैंड, जर्मनी और डिफेंडिंग चैंपियन ब्रिटेन से लगातार तीन मैचों में हार से प्रारम्भ हुआ. हालांकि टीम ने बहुत बढ़िया वापसी करते हुए अपने से ऊपर रैंकिंग वाली आयरलैंड टीम को 1-0 से हराया. इसके बाद साउथ अफ्रीका को 4-3 से शिकस्त दी. भारतीय टीम की क्वार्टर फाइनल में स्थान पूल-ए के अंतिम मैच में आयरलैंड को 2-0 से हराने के बाद तय हुई.

इसके बाद क्वार्टर फाइनल में तीन बार की ओलिंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हरा दिया. भारतीय महिला टीम इस जीत के साथ पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में स्थान बनाने में सफल हो पाई थी. इस जीत ने हॉकी के प्रति हिंदुस्तान के नजरिए को बदल दिया. टीम में शामिल ज्यादातर खिलाड़ी गरीब परिवार से थे. तैयारियों के लिए संसाधन न होने के बावजूद ओलंपिक में परफॉर्म करना बड़ी बात थी. टीम इंडिया की जीत ने हर फैंस का दिल खुशी से भर दिया. सेमीफाइनल में हालांकि टीम को अर्जेंटीना के हाथों 1-0 से हार का सामना करना पड़ा. तब भी टीम के पास कांस्य पदक की आस बाकी थी. 

ब्रॉन्ज मेडल मैच में भी टीम इंडिया को ग्रेट ब्रिटेन के हाथों हार का सामना करना पड़ा. ओलंपिक मेडल चूकने के बाद टीम इंडिया के प्लेयर्स मैदान पर ही फूट-फूटकर रोने लगीं. सविता पूनिया, वंदना कटारिया, कैप्टन रानी रामपाल और नेहा गोयल समेत तमाम खिलाड़ी इमोशनल हो गए. इन सभी खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट गजब का प्रदर्शन किया था. अहम मैच में इतना अच्छा खेलने के बावजूद हारने से फैंस का भी दिल टूटा था और उनकी आंखों में भी आंसू थे. भारतीय महिला हॉकी टीम के दबदबे के बारे में आप इस बात से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि ब्रिटिश खिलाड़ियों ने भारतीय खिलाड़ियों के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं.
महिलाएं एकतरफ मेडल जीतने से चूक गईं, वहीं पुरुष हॉकी टीम ने मेडल जीतकर वर्ष 2021 को यादगार बना दिया. टोक्यो ओलंपिक खेलों में पुरुष हॉकी टीमों ने प्रेरणादायक प्रदर्शन कर इतिहास रचा, जिसे युगों तक याद रखा जाएगा. पुरुष टीम ने ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतकर पदक के चार दशकों के सूखे को समाप्त किया. भारतीय पुरुष टीम खेल में पदक के 41 वर्ष के लंबे इन्तजार को खत्म करके अपने गौरवशाली अतीत को फिर से याद किया और एक नयी प्रातः काल की आरंभ की.

ओलंपिक में हिंदुस्तान के यात्रा को याद करें तो उसने न्यूजीलैंड के विरूद्ध अपना पहला मुकाबला 3-2 से जीता. हालांकि इसके बाद दूसरे मैच में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों 1-7 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा. लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने जोरदार वापसी की और फिर स्पेन को 3-0, अर्जेंटीना को 3-1 और जापान को 5-3 से हराया. इस के साथ भारतीय टीम ग्रुप-ए में पांच में से चार मुकाबले जीतकर दूसरे जगह पर रही.

मनप्रीत सिंह की प्रतिनिधित्व में टीम ने क्वार्टरफाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को एकतरफा मुकाबले में 3-1 से पटखनी दी. इस जीत के साथ ही भारतीय टीम 49 वर्ष बाद ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने में पास रही. सेमीफाइनल में पुरुष हॉकी टीम को बेल्जियम से 5-2 से हार मिली. इसके बाद ब्रॉन्ज मेडल के लिए हुए मैच में हिंदुस्तान ने ग्रेट ब्रिटेन को 5-4 से हराकर इतिहास रचा. 

टीम ने 41 वर्ष के सूखे को समाप्त करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता. ओलंपिक में हिंदुस्तान की हॉकी टीम को अंतिम पदक 1980 में मॉस्को में मिला था, जब वासुदेवन भास्करन की कप्तानी में टीम ने गोल्ड जीता था. हिंदुस्तान ने ओलंपिक में सबसे अधिक मेडल पुरुष हॉकी में जीते हैं. टीम ने 1928, 1932, 1936, 1948, 1952, 1956, 1964 और 1980 ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था. इसके अतिरिक्त 1960 में सिल्वर और 1968, 1972 और टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है. भारतीय हॉकी में हुए इस कमाल ने हर किसी को इमोशनल कर दिया था. 


बेहद सरलता से आउट हुए विराट कोहली रह गए दंग, देखें VIDEO

बेहद सरलता से आउट हुए विराट कोहली रह गए दंग, देखें VIDEO

सेंचुरियन2018 में भारतीय टीम साउथ अफ्रीका दौरे पर गई थी. जोहानिसबर्ग में टीम इंडिया को नेट प्रैक्टिस में बॉलिंग करने के लिए कुछ लोकल गेंदबाजों को बुलाया गया था. उसमें दो जुड़वा भाई थे. उनमें से एक 17 वर्षीय ने भारतीय इंटरनेशनल क्रिकेटरों को खूब परेशान किया था.

अब आप सोच रहे हैं हम यहां 2018 दौरे और नेट बॉलर की बात क्यों कर रहे हैं? तो बता दें कि उसी नेट बॉलर मार्को जेनसेन ने को सेंचुरियन टेस्ट की दूसरी पारी में 18 रनों पर आउट कर दिया.

बॉक्सिंग डे टेस्ट के चौथे दिन लंच के बाद पहले ही ओवर की पहली गेंद पर विराट कोहली अपना विकेट गंवा बैठे. डेब्यू स्टार मार्को की गेंद गुड लेंथ पर टप्पा खाने के बाद ऑफ स्टंप से बहुत ज्यादा बाहर निकल रही थी और कोहली बल्ला अड़ा बैठे. बाकी का कार्य विकेट के पीछे खड़े क्विंटन डि कॉक ने पूरा किया. बहुत सरलता से कोहली का सीधा कैच लपक लिया. कोहली आउट होने के बाद दंग दिखे. कुछ देर तक वहीं खड़े रह गए.

विराट कोहली के लिए पिछले दो साल संघर्ष वाले रहे हैं. उन्होंने अपना अंतिम शतक बांग्लादेश के विरूद्ध 2019 में लगाया था. उसके बाद से वह कोई बड़ी पारी नहीं खेल सके. सेंचुरियन टेस्ट की बात करेंगे तो यहा वह पहली पारी में भी ऐसे ही हाउट हुए थे.

2021 की बात करें तो कोहली ने 11 टेस्ट में महज 28.21 की औसत से 536 रन बनाए. इस दौरान उनके नाम 4 अर्धशतक रहे, जबकि बेस्ट स्कोर 72 रहा. बेकार फॉर्म की वजह से ही उन्हें टी-20 टीम की कप्तानी छोड़नी पड़ी, जबकि बाद में बीसीसीआई ने वनडे की कप्तानी से भी हटाने का निर्णय किया.


गौरतलब है कि हिंदुस्तान ने अपनी दूसरी पारी में 174 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका के सामने 305 रन का लक्ष्य रखा. हिंदुस्तान ने पहली पारी में 327 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 197 रन पर आउट करके 130 रन की बढ़त हासिल की थी. हिंदुस्तान की तरफ से दूसरी पारी में ऋषभ पंत ने सर्वाधिक 34 रन बनाए. दक्षिण अफ्रीका के लिए कागिसो रबाडा और मार्को जेनसेन ने चार-चार जबकि लुंगी एनगिडी ने दो विकेट लिए.