IND VS ENG: मोटेरा में टीम इंडिया की जीत पक्की!

IND VS ENG: मोटेरा में टीम इंडिया की जीत पक्की!

नई दिल्ली हिंदुस्तान और इंग्लैंड (India vs England) के बीच तीसरा टेस्ट 24 फरवरी से अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम (Motera) में खेला जाएगा यह टेस्ट डे-नाइट है इस कारण पिंक बॉल से खेला जाएगा पिंक बॉल से देश में अब तक एक ही टेस्ट हुआ है और टीम इंडिया ने इसमें जीत दर्ज की थी ऐसे में टीम इंडिया का यह मैच जीतना लगभग पक्का माना जा रहा है इसके तीन बड़े कारण भी हैं अभी चार मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर है वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिए सीरीज के बचे दोनों मैच दोनों टीम के लिए अहम हैं

पहला कारण- अब तक छह टीमों ने घर में डे-नाइट टेस्ट खेले हैं इसमें टीम इंडिया के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और विंडीज हैं विंडीज को छोड़कर सभी ने घर में सभी डे-नाइट टेस्ट जीते हैं विंडीज की टीम टेस्ट में निर्बल भी मानी जाती है और उसकी वर्ल्ड रैंकिंग 8 है यानी टॉप टीमों ने घर में डे-नाइट नहीं हारा है हिंदुस्तान में टेस्ट एसजी बॉल से जबकि इंग्लैंड में ड्यूक बॉल से खेला जाता है इसका भी लाभ हमें मिलेगा

दूसरा कारण- इंग्लैंड की टीम हमें मोटेरा स्टेडियम में टेस्ट में कभी भी नहीं हरा सकी है दोनों के बीच मैदान पर दो टेस्ट खेले गए हैं टीम इंडिया ने एक में जीत दर्ज की है जबकि एक मैच ड्रॉ रहा है टीम इंडिया मोटेरा में 13 वर्ष से नहीं हारी है और आखिरी तीन में से एक मैच जीता है, दो ड्रॉ रहे हैं पिच को स्पिन गेंदबाजों के हिसाब से तैयार किया जा रहा है ऐसे में आर अश्विन और अक्षर पटेल एक बार फिर इंग्लिश टीम पर भारी पड़ सकते हैं तीसरा कारण- टीम इंडिया ने 9 वर्ष से घर में कोई टेस्ट सीरीज नहीं हारी है और लगातार 12 सीरीज जीती है इस दौरान टीम ने बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, विंडीज, अफगानिस्तान, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड को हराया है यानी 8 टीमें पिछली 12 सीरीज से हमें घर में नहीं हरा सकी हैं इसके अतिरिक्त टीम इंडिया ने इंग्लैंड को घर में खेली गई पिछली सीरीज में 4-0 से हराया था पांच मैचों की सीरीज का एक मैच ड्रॉ रहा था दो मैच हमने पारी से जीते थे
अश्विन और कोहली जीत के हीरो रहे थे
नवंबर-दिसंबर 2016 में हिंदुस्तान और इंग्लैंड के बीच सीरीज में टीम की जीत के हीरो विराट कोहली और आर अश्विन रहे थे कोहली ने 5 मैच की 8 पारियों में 109 के औसत से सबसे अधिक 655 रन बनाए थे दो शतक और दो अर्धशतक लगाया था वहीं ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने सबसे अधिक 28 विकेट झटके थे तीन बार पांच विकेट और एक बार 10 विकेट लेने का कारनामा किया था मौजूदा सीरीज के भी दो मैच में अश्विन 17 विकेट ले चुके हैं


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

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कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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