राजस्थान रॉयल्स ने स्टीव स्मिथ को किया रिलीज, संजू सैमसन होंगे टीम के नए कप्तान

राजस्थान रॉयल्स ने स्टीव स्मिथ को किया रिलीज, संजू सैमसन होंगे टीम के नए कप्तान

आइपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स ने टीम के कप्तान स्टीव स्मिथ को रीलिज कर दिया है। अब वो आइपीएल 2021 में इस टीम के लिए खेलते हुए नजर नहीं आएंगे। स्टीव स्मिथ की कप्तानी में इस टीम का प्रदर्शन यूएई में खेले गए आइपीएल 2020 में कुछ खास नहीं रहा था। स्टीव स्मिथ पर फैसला लेने के लिए टीम मैनेजमेंट ने काफी चर्चा की थी और फिर से फैसला किया गया। स्मिथ जहां बतौर कप्तान टीम के लिए कुछ खास नहीं कर पा रहे थे तो वहीं बतौर बल्लेबाज भी वो प्रभावी नहीं थे। 

राजस्थान फ्रेंचाइजी की तरफ से कहा गया है कि, अगले सीजन के लिए टीम का कप्तान संजू सैमसन को बनाया गया है। अब वो स्टीव स्मिथ की जगह टीम की कप्तानी करेंगे साथ ही कुमार संगकारा को टीम का नया डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। स्टीव स्मिथ के असावा वरुण आरोन, अंकित राजपूत, टॉम कुर्रन जैसे खिलाड़ियों को भी बाहर कर दिया गया है। 


स्टीव स्मिथ की कप्तानी में आर आर पिछले सीजन यानी आइपीएल 2020 में सबसे आखिरी नंबर पर रही थी। इस टीम ने 14 लीग मैच खेले थे जिसमें से इसे 6 मैचों में जीत मिली थी जबकि 8 मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। इस टीम के कुल 12 अंक थे और अंक तालिका में ये टीम आखिरी पायदान पर थी। स्टीम स्मिथ की बल्लेबाजी की बात करें तो उन्होंने इस सीजन के 14 मैचों में 25.91 की औसत से 311 रन बनाए थे जिसमें दो अर्धशतक शामिल था। आइपीएल के 13वें सीजन में उनका बेस्ट स्कोर 69 था और उनका स्ट्राइक रेट 131.22 का था। 


राजस्थान रॉयल्स ने इन खिलाड़ियों को किया रीटेन-

संजू सैमसन, बेन स्टोक्स, जोफ्रा आर्चर, जोस बटलर, रियान पराग, श्रेयस गोपाल, राहुल तेवतिया, महिपाल लोमरोर, कार्तिक त्यागी, एंड्रयू टे, जयदेव उनादकट, मयंक मारकंडे, यशस्वी जयसवाल, अनुज रावत, डेविड मिलर, मनन वोहरा, रॉबिन उथप्पा। 

इन खिलाड़ियों को किया गया रिलीज-

स्टीव स्मिथ, अंकित राजपूत, ओशाने थॉमस, आकाश सिंह, वरुण आरोन, टॉम कुर्रन, अनिरुद्ध जोशी, शशांक सिंह। 


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

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कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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