टी-20 मैच में जड़ा तूफानी शतक, आईपीएल से पहले रंग में दिखे रैना

टी-20 मैच में जड़ा तूफानी शतक, आईपीएल से पहले रंग में दिखे रैना

नई दिल्ली आईपीएल 2021 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए अच्छी समाचार है सीएसके के बाएं हाथ के बल्लेबाज सुरेश रैना ने हरियाणा के गुरुग्राम में हुए एक टी-20 मैच में 46 गेंद पर 104 रन की पारी खेली उन्होंने अपनी इस पारी में 11 चौके और 7 छक्के लगाए यह मुकाबला निझावान वॉरियर्स और टाइटंस जेडएक्स टीम के बीच खेला गया था रैना वॉरियर्स की तरफ से इस मैच में खेलने उतरे थे

इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए टाइटन्स ने 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 229 रन बनाए टारगेट का पीछा करने उतरे वॉरियर्स ने रैना की पारी के दम पर 19.5 ओवर में 3 विकेट खोकर ही जीत हासिल कर ली रैना इस मैच में प्रारम्भ से ही रंग में नजर आए और 19 गेंदों ही अपनी फिफ्टी पूरी कर ली इसके बाद भी उनका तेजी से रन बनाने का सिलसिला नहीं थमा और केवल 46 गेंद में इस बल्लेबाज ने सेंचुरी लगाई रैना आखिर तक टिके रहे और अपनी टीम को जीत दिला दी इससे पहले रैना ने मैच में गेंदबाजी भी की उन्होंने 4 ओवर में 27 रन देकर एक विकेट भी लिया

रैना ने पारिवारिक वजहों से पिछला आईपीएल नहीं खेला था
बता दें कि पिछले वर्ष यूएई में हुए आईपीएल में रैना पारिवारिक वजहों से नहीं खेले थे उनके इस निर्णय को लेकर बहुत ज्यादा बवाल मचा था ऐसे कयास भी लगाए गए थे कि सीएसके का टीम मैनेजमेंट रैना के अंतिम समय में लीग से हटने के निर्णय से नाराज था लेकिन, टीम ने उन पर विश्वास जताया और 14वें सीजन के लिए उन्हें रिटेन किया उनकी गैरमौजूदगी में सीएसके का पिछले सीजन में प्रदर्शन बहुत बेकार रहा था आईपीएल इतिहास में टीम पहली बार प्लेऑफ के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर पाई थी
मुश्ताक अली टूर्नामेंट में रैना का बल्ला नहीं चला
पिछले वर्ष इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रैना ने इस वर्ष जनवरी में सैयद मुश्ताक अली टी-20 टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेला था यूपी की ओर से खेलते हुए उन्होंने पंजाब के विरूद्ध अर्धशतक जमाया लेकिन इसके बाद किसी भी मैच में उनका बल्ला नहीं चला रेलवे के विरूद्ध रैना 6 और जम्मू और कश्मीर के विरूद्ध वे खाता भी नहीं खोल सके हालांकि, आईपीएल से पहले उनकी इस पारी से उन्होंने फॉर्म में लौटने के इशारा दे दिए हैं

रैना आईपीएल में सबसे अधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज
रैना ने आईपीएल के 193 मैच में 137 से अधिक की हड़ताल रेट से 5368 रन बनाए हैं वे लीग में एक शतक और 38 अर्धशतक लगा चुके हैं वे लीग के इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में विराट कोहली के बाद दूसरे जगह पर हैं कोहली ने 192 मैच में 5878 रन बनाए हैं


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

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कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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