केदार जाधव समेत ये खिलाड़ी हुए बाहर, सुरेश रैना को IPL 2021 के लिए CSK ने किया रिटेन

केदार जाधव समेत ये खिलाड़ी हुए बाहर, सुरेश रैना को IPL 2021 के लिए CSK ने किया रिटेन

इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब तीन बार जीत चुकी चेन्नई सुपर किंग्स ने फैसला किया है कि वो टीम के सीनियर खिलाड़ी व ऑलराउंडर सुरेश रैना को अगले सीजन के लिए रिटेन करेंगे। सुरेश रैना ने आइपीएल 2020 में निजी कारणों की वजह से खेलने से मना कर दिया था। हालांकि सुरेश रैना के मना करने के पीछे की वजह ये भी कहा जा रही थी कि, उनका टीम मैनेजमेंट के साथ कुछ खटपट है। सुरेश रैना के बिना मैदान पर उतरने वाली सीएसके के प्रदर्शन पिछले सीजन में काफी खराब रहा था और ये टीम एम एस धौनी की कप्तानी में पहली बार प्लेऑफ में पहुंचने में भी कामयाब नहीं हो पाई थी। 

सुरेश रैना का प्रदर्शन सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया है इसके बावजूद उन्हें सीएसके ने रिटेन कर लिया है। सीेएसके मैनेजमेंट धौनी की कप्तानी में एक बार फिर से टीम को मजबूत करने की प्रयास में है जिससे कि 2021 में टीम का प्रदर्शन अच्छा हो सके। सुरेश रैना के अलावा सीएसके ने फॉफ डुप्लेसिस व ड्वेन ब्रावो को भी रिटेन किया है। रवींद्र जडेजा, अंबाती रायुडू, इमरान ताहिर, शार्दुल ठाकुर, रितुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों को भी रिटेन किया गया है। 


वहीं सीएसके के तरफ से आइपीएल 2021 सीजन के लिए केदार जाधव, मुरली विजय और पीयूष चावला को रीलिज कर दिया गया है। इन खिलाड़ियों को इनके खराब प्रदर्शन की वजह से फ्रेंचाइजी ने टीम से बाहर किया है। अब ये खिलाड़ी आइपीएल 2021 की नीलामी में फिर से हिस्सा लेने के लिए स्वतंत्र हैं। 

सीएसके द्वारा रिटेन किए जाने वाले खिलाड़ी-

सुरेश रैना, फॉफ डुप्लेसिस, ड्वेन ब्रावो, एम एस, धौनी, एन जगदीशन, रितुराज गायकवाड़, के एम आसिफ, रविंद्र जडेजा, जोस हेडलवुड, करण शर्मा, अंबाती रायुडू, इमरान ताहिर, दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर, मिचेल सैंटनर, लुंगी नगीडी, सैम कुर्रन, एस किशोर। 

सीएसके द्वारा रीलिज किए जाने वाले खिलाड़ी-

केदार जाधव, मुरली विजय, पीयूष चावला, हरभजन सिंह, शेन वॉटसन। 


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

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कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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