ऑस्ट्रेलिया दौरा समाप्त, अब जानिए भारतीय टीम के अगले मैचों का शेड्यूल

ऑस्ट्रेलिया दौरा समाप्त, अब जानिए भारतीय टीम के अगले मैचों का शेड्यूल

भारतीय टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा ब्रिसबेन टेस्ट के साथ खत्म हो गया है। अब भारतीय टीम अपने अगले अभियान को शुरू करेगी। भारतीय टीम के सभी खिलाड़ी स्वदेश लौट आए हैं और जल्द ही फिर से बायो-बबल में शामिल हो जाएंगे, क्योंकि टीम इंडिया को अपनी मेजबानी में इंग्लैंड का टीम का सामना करना है। भारत और इंग्लैंड के बीच तीनों फॉर्मेट की सीरीज अगले महीने से शुरू हो रही है, जो मार्च के आखिर तक चलेगी।

भारत और इंग्लैंड की टीम आइसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के तहत चार मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेंगी। इस सीरीज की शुरुआत 5 फरवरी से हो रही है। सीरीज के पहले दो टेस्ट मैच चेन्नई में खेले जाएंगे। इस सीरीज का एक मुकाबला डे-नाइट टेस्ट भी होगा, जो अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में खेला जाएगा। 24 फरवरी से होने वाला पिंक बॉल टेस्ट मजेदार होगा, क्योंकि अहमदाबाद में बनकर तैयार हुए दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में पहली बार कोई इंटरनेशनल मुकाबला खेला जाएगा।


चार मैचों की टेस्ट सीरीज के बाद दोनों देशों का आमना-सामना 5 मैचों की टी20 सीरीज में होगा। सीरीज के सभी मैच अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम में खेले जाने हैं। टी20 सीरीज की शुरुआत 12 मार्च से होनी है। वहीं, टी20 सीरीज के बाद तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी, जिसकी शुरुआत 23 मार्च से होगी। वनडे सीरीज के सभी मुकाबले पुणे में खेले जाएंगे। वनडे सीरीज के पहले दो मैच डे-नाइट मैच होंगे, जबकि आखिरी मैच दिन में खेला जाएगा।


India vs Australia Test Series Full Schedule

पहला टेस्ट: 5 से 9 फरवरी - चेन्नई में सुबह साढ़े 9 बजे से

दूसरा टेस्ट: 13 से 17 फरवरी - चेन्नई में सुबह साढ़े 9 बजे से

तीसरा टेस्ट: 24 से 28 फरवरी - अहमदाबाद में दोपहर 2 बजे से

चौथा टेस्ट: 4 से 8 मार्च - अहमदाबाद में सुबह साढ़े 9 बजे से

India vs Australia T20I Series Full Schedule


पहला T20: 12 मार्च को अहमदाबाद में शाम 6 बजे से

दूसरा T20: 14 मार्च को अहमदाबाद में शाम 6 बजे से

तीसरा T20: 16 मार्च को अहमदाबाद में शाम 6 बजे से

चौथा T20: 18 मार्च को अहमदाबाद में शाम 6 बजे से

पांचवां T20: 20 मार्च को अहमदाबाद में शाम 6 बजे से

India vs Australia ODI Series Full Schedule

पहला वनडे मैच: 23 मार्च को पुणे में दोपहर ढाई बजे बजे

पहला वनडे मैच: 26 मार्च को पुणे में दोपहर ढाई बजे बजे

पहला वनडे मैच: 28 मार्च को पुणे में सुबह साढ़े 9 बजे बजे


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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