इस क्रिकेटर की बेटी ने कहा- पापा, जहां-जहां आपको गेंद लगी है, वहां-वहां मैं KISS करूंगी

इस क्रिकेटर की बेटी ने कहा- पापा, जहां-जहां आपको गेंद लगी है, वहां-वहां मैं KISS करूंगी

भारतीय टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच की दूसरी पारी के दौरान शरीर में चोट लगने का दृश्य उनके परिवार के लिए डराने वाला था। यहां तक कि उनकी पत्नी पूजा रोती थीं और अपनी आंखों को टेलीविजन से दूर ले जाती थीं, लेकिन पुजारा की बेटी अदिति, जो दो साल की हैं, उनके पास पिता के दर्द को दूर करने के लिए अनोखा उपाय था।

चेतेश्वर पुजारा ने एक इंटरव्यू में बताया है कि उनकी बेटी ने कहा है, "जब वह घर आएंगे तो मैं वहां-वहां उनको किस करूंगी, जहां-जहां उनको चोट लगी है। वह इससे ठीक हो जाएंगे।" भारतीय खिलाड़ी अब घर लौट रहे हैं। कहते है कि जैसा बाप होता है, वैसे ही बच्चे भी होते हैं। यही कारण है कि महज दो साल की बेटी ने पिता का दर्द दूर करने के लिए नया तरीका अपनाने का वादा किया है। पुजारा के शरीर पर तमाम गेंदें लगी थीं।


ब्रिसबेन टेस्ट मैच की चौथी पारी में करीब आधा दर्जन गेंदों को अपने शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर झेलने वाले पुजारा ने कहा है, "यह वही है जो मैं उसके साथ करता हूं, जब वह गिर जाती है। इसलिए उसको भरोसा है कि किस करने से हर एक घाव भर सकता है।" चेतेश्वर पुजारा 2018-19 के दौरे के दौरान जीती गई टेस्ट सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने ज्यादा रन नहीं बनाए। बावजूद इसके उन्होंने इस सीरीज को महान बताया।


उन्होंने पांच घंटे से अधिक समय तक बल्लेबाजी करने के बाद 56 रन बनाए और शुभमन गिल (91) के साथ 114 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। उधर, पैट कमिंस एंड कंपनी द्वारा कुछ शत्रुतापूर्ण तेज गेंदबाजी ने पुजारा के हेलमेट, कंधों और कमर को काफी टारगेट किया। वहीं, जब पुजारा से पूछा गया कि आपको दर्द नहीं होता? इस पर उन्होंने कहा कि मैं कभी भी पेन किलर नहीं खाता। इससे मुझे दर्द सहन करने की क्षमता मिलती है।


इस खेल से बनी पहचान, भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा

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कद 5 फुट 3 इंच, लेकिन उनका हौसला और उनकी उपलब्धियां उनके कद से कई ज्यादा उपर रही। किसी को यह उम्मीद नहीं थी कि ये छोटी कद वाली महिला कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर वेटलिफ्टिंग के लिए एक बड़ी नाम बन जाएगी। इतना ही नहीं, किसी ने ये तक नहीं सोचा होगा कि 5 फुट 3 इंच की इस महिला को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे वेटलिफ्टर कुंजारानी देवी की, जिन्होंने 38 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर भारतीय महिलाओं के लिए एक मिशाल बनीं। बता दें कि कुंजारानी का आज जन्मदिन है। इस शानदार मौके पर हम आज उनके अनछूए पलों के बारे में बात करेंगे, तो चलिए जानते है उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानियां…

मणिपुर की हैं कुंजारानी
वेटलिफ्टर कुंजारानी का जन्म 1 मार्च 1968 में मणिपुर के कैरंग मायाई लेकाई में हुआ था। उन्होंने इम्फाल के सिंदम सिंशांग आवासीय हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की, वहीं इम्फाल के महाराजा बोध चन्द्र कॉलेज से उन्होंने स्नातक तक की शिक्षा पूरी की। उन्होंने शैक्षिणिक जीवन में ही यह लक्ष्य बना लिया था कि उन्हें वेटलिफ्टिंग करना है। हालांकि इस बीच उन्होंने कई खेलों में भी हिस्सा लिया।

कैसे खेल से प्रेरित हुई कुंजारानी

कुंजारानी खेल में एंट्री कैसे ली, इसकी भी कहानी का दिलचस्प है। कुंजारानी जब 14 साल की थी, तब उन्होंने 1982 के एशियन गेम्स के बारे में सुना। उस दौरान भारतीय ट्रैक क्वीन पीटी ऊषा लोगों के जुबान पर छाई हुई थी। उनकी कामयाबी को देख कुंजारानी काफी प्रेरित हुई थी। एक चैनल के इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में चर्चा करते हुए बताया था, “उस इवेंट ने मुझे ऐसा महसूस कराया कि मैं भी खेल में शानदार प्रदर्शन कर सकती हूं। उसके बाद मैंने बहुत सारे खेल खेलना शुरू कर दिए, फिर चाहे वह हॉकी हो, फुटबॉल हो या ट्रैक पर दौड़ना हो।” ये वहीं दौर था, जब कुंजारानी खेल की ओर आकर्षित हुई।

पावरलिफ्टिंग से की शुरूआत
खेल जगत का चुनाव करने के बाद कुंजारानी पावरलिफ्टिंग से अपनी करियर की शुरूआत की। इस खेल में उन्होंने अपनी प्रतिभा का कला दिखाते हुए चंद महीनों में ही राष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। लेकिन उनकी आंखों ने तो कुछ और ही सपना बुन रखा था। बता दें कि कुंजारानी ने ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेना चाहती थी। यही वजह थी कि उन्होंने पावरलिफ्टिंग का भी खेल छोड़ दिया।

वेटलिफ्टिंग में ली एंट्री
ओलंपिक का सपना देखते हुए कुंजारानी ने पावरलिफ्टिंग छोड़ वेटलिफ्टिंग में एंट्री ली। एक इंटरव्यू में कुंजारानी वेटलिफ्टिंग के बारे में बताया, “मैं साफतौर पर देख सकती थी कि जो भार मैं उठा पा रही थी उससे विश्व रिकॉर्ड बहुत दूर नहीं था। मेरे कोच हमेशा मुझे कहते थे कि अगर मैं कड़ी मेहनत करती रही तो भारत का प्रतिनिधित्व करने का मेरा सपना जल्द ही साकार होगा।”

वर्ल्ड चैंपियनशिप
वर्ष          खेल आयोजन     किलोग्राम        वर्ग पदक

1989        मैनचेस्टर               44                रजत

1991       डोनॉशेचिंगन           44                रजत

1992          वर्ना                     44                रजत

1994       इस्तांबुल                 46                रजत

1995        वारसॉ                    46                रजत

1996       गुआंगज़ौ                46                 रजत

1997       चियांग माई             46                 रजत

ये वो गेम्स है जिनमें कुंजारानी वर्ल्ड चैंपियनशिप रही है, लेकिन कभी स्वर्ण पदक तक नहीं पहुंच पाई। फिर उन्होंने ने 1990 के बीजिंग और 1994 के हिरोशिमा एशियाई गेम्स में कास्य पदक ही प्राप्त कर पाई। लंबे समय के बाद साल 2004 में एथेंस ओलंपिक गेम्स में चौथे पायदान तक ही सीमित रही। फिर साल 2006 में कमबैक करते हुए कुंजारानी ने मेलबर्न कॉमनवेल्‍थ में हिस्सा लेते हुए देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

पद्मश्री ने नवाजा गया
खेल जगत में कुंजारानी ने अपने 17 साल बिताए। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां भी हासिल की। साल 1990 में कुंजारानी को अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं 1996 में भारत के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न को व्यावसायिक टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के साथ साझा करते हुए सम्मानित किया गया। इसके अलावा 2011 में कुंजारानी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


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