आम आदमी पार्टी की आज के दिन हुई थी स्थापना

आम आदमी पार्टी की आज के दिन हुई थी स्थापना

भारतीय राजनीति के इतिहास में आम आदमी पार्टी एक ऐसा राजनीति दल है जो अपनी स्थापना दो साल के अंदर ही सत्ता हासिल करने वाला दल बन गया। एक सामाजिक आंदोलन से उभरे कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने कुछ लोगों को लेकर इस दल का गठन किया और एक बार नहीं दो बाद दिल्ली की सत्ता हथियाई । इसके गठन की घोषणा 26 नवम्बर 2012 को जंतर मंतर, दिल्ली में की गयी थी।

देश भें बढ़ते भ्रष्ट्राचार को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अन्न हजारे ने सन 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन नामक संगठन ने अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए जन लोकपाल आंदोलन के दौरान भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा जनहित की उपेक्षा के खिलाफ आवाज उठाई। अन्ना भ्रष्टाचार विरोधी जनलोकपाल आंदोलन को राजनीति से अलग रखना चाहते थे, जबकि अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगियों की यह राय थी कि पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा जाये। इसके बाद अन्ना के शिष्य रहे अरविंद केजरीवाल उनसे अलग हो गए और अपने दल की स्थापना की। इसके बाद हुए चुनावों में आम आदमी पार्टी ने 28 सीटों के साथ और कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनायी।

सरकार ने दिल्ली भर में 10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए
अरविंद केजरीवाल ने 26 दिसंबर 2013 को दिल्ली के 8 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। जनलोकपाल बिल को लेकर यह सरकार गिर गयी। 2013 में 49 दिन की गठबंधन वाली सरकार से लेकर 2015 में 67 सीटों वाली सरकार तक इस पार्टी की उपलब्धियों में शामिल है। 2015 से 2018 के बीच पार्टी को कई अंदरूनी विवादों से जूझना पड़ा और योगेंद्र यादव से लेकर प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास जैसे बड़े नेताओं से मतभेद काफी चर्चा में रहे। केजरीवाल की सरकार ने दिल्ली भर में 10-15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए ।

2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आप ने दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में से 67 सीटें जीत लीं और केजरीवाल एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। इस चुनाव में भाजपा को तीन और कांग्रेस को कोई सीट हाथ नहीं लगी। लोकसभा में आप के चार और राज्यसभा में तीन सदस्य हैं। इसके बाद 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा के आम चुनाव मे आम आदमी पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ जीती है। 70 में से 62 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने कब्जा जमाया है। दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनाव (2015) में आम आदमी पार्टी (आप) को कुल 70 में 67 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।


पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

हर साल करीब पांच हजार टन ब्रह्मांडीय धूल पृथ्वी पर गिरती है। इसमें मुख्यत: उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के बारीक कण होते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार इस धूल की मात्र पृथ्वी पर गिरने वाली अंतरिक्ष की चट्टानों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। पृथ्वी पर हर साल करीब दस टन बड़ी चट्टानें गिरती हैं। अंतरिक्ष की धूल की भारी मात्र के बावजूद इसे खोज पाना मुश्किल होता है। बारिश की वजह से यह धूल बह जाती है और कई स्थानों पर पृथ्वी की अपनी धूल इस धूल को ढक देती है, लेकिन अंटार्कटिका में शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष की धूल को एकत्र करने का तरीका विकसित कर लिया है। 

फ्रांस के राष्ट्रीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र के भौतिकविद ज्यां दुप्रो और उनके सहयोगियों ने इस इलाके से अंतरिक्ष धूल एकत्र करने के लिए 20 वर्षो में छह अभियान आयोजित किए हैं। इस इलाके में अंतरिक्ष की धूल की परतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इन परतों के आधार पर यह अनुमान लगा सकते हैं कि हर साल अंतरिक्ष से कितनी धूल पृथ्वी पर गिरती है। शोधकर्ताओं ने इस इलाके में खाइयां खोदकर 20 किलो के बैरल में बर्फ की परतों को जमा किया। बैरल को रिसर्च स्टेशन की प्रयोगशाला में सावधानीपूर्वक बर्फ की परतों को पिघलाया। बर्फ के पिघलने के बाद बची धूल के कणों को अलग कर शोधकर्ताओं ने सुनिश्चित किया कि इन नमूनों में उनके अपने दस्तानों से किसी तरह की दूसरी मिलावट न होने पाए।


मध्य अंटार्कटिका में एकत्र किए गए बर्फ के नमूनों के विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि करीब 5,200 टन अंतरिक्ष की धूल हर साल पृथ्वी पर गिरती है। इन धूल कणों का व्यास 30 से लेकर 200 माइक्रोमीटर के बीच होता है। इस प्रकार ये सूक्ष्म कण पृथ्वी पर पारलौकिक पदार्थ के सबसे बड़े स्नोत हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट करने वाली अधिकांश अंतरिक्ष शिलाएं जल जाती हैं। इससे पृथ्वी पर गिरने वाली धूल की मात्र कम हो जाती है। हर साल करीब 15,000 टन धूल वायुमंडल में दाखिल होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि करीब एक-तिहाई हिस्सा ही पृथ्वी पर पहुंच पाता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि 80 प्रतिशत धूल संभवत: कुछ खास धूमकेतुओं से आती है। छोटी कक्षा वाले ये धूमकेतु बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नियंत्रित होते हैं। करीब 20 प्रतिशत धूल संभवत: क्षुद्रग्रहों से आती है। पृथ्वी पर गिरने वाले पारलौकिक पदार्थो का अध्ययन खगोल-भौतिकी और भू-भौतिकी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पृथ्वी पर इस समय मौजूद कई तत्व संभवत: अंतरिक्ष की चट्टानों द्वारा लाए गए थे। कुछ सिद्धांतों के अनुसार अंतरिक्ष की चट्टानों के जरिये आने वाले तत्वों और मॉलिक्यूल्स ने पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 


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