पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

हर साल करीब पांच हजार टन ब्रह्मांडीय धूल पृथ्वी पर गिरती है। इसमें मुख्यत: उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के बारीक कण होते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार इस धूल की मात्र पृथ्वी पर गिरने वाली अंतरिक्ष की चट्टानों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। पृथ्वी पर हर साल करीब दस टन बड़ी चट्टानें गिरती हैं। अंतरिक्ष की धूल की भारी मात्र के बावजूद इसे खोज पाना मुश्किल होता है। बारिश की वजह से यह धूल बह जाती है और कई स्थानों पर पृथ्वी की अपनी धूल इस धूल को ढक देती है, लेकिन अंटार्कटिका में शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष की धूल को एकत्र करने का तरीका विकसित कर लिया है। 

फ्रांस के राष्ट्रीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र के भौतिकविद ज्यां दुप्रो और उनके सहयोगियों ने इस इलाके से अंतरिक्ष धूल एकत्र करने के लिए 20 वर्षो में छह अभियान आयोजित किए हैं। इस इलाके में अंतरिक्ष की धूल की परतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इन परतों के आधार पर यह अनुमान लगा सकते हैं कि हर साल अंतरिक्ष से कितनी धूल पृथ्वी पर गिरती है। शोधकर्ताओं ने इस इलाके में खाइयां खोदकर 20 किलो के बैरल में बर्फ की परतों को जमा किया। बैरल को रिसर्च स्टेशन की प्रयोगशाला में सावधानीपूर्वक बर्फ की परतों को पिघलाया। बर्फ के पिघलने के बाद बची धूल के कणों को अलग कर शोधकर्ताओं ने सुनिश्चित किया कि इन नमूनों में उनके अपने दस्तानों से किसी तरह की दूसरी मिलावट न होने पाए।


मध्य अंटार्कटिका में एकत्र किए गए बर्फ के नमूनों के विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि करीब 5,200 टन अंतरिक्ष की धूल हर साल पृथ्वी पर गिरती है। इन धूल कणों का व्यास 30 से लेकर 200 माइक्रोमीटर के बीच होता है। इस प्रकार ये सूक्ष्म कण पृथ्वी पर पारलौकिक पदार्थ के सबसे बड़े स्नोत हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट करने वाली अधिकांश अंतरिक्ष शिलाएं जल जाती हैं। इससे पृथ्वी पर गिरने वाली धूल की मात्र कम हो जाती है। हर साल करीब 15,000 टन धूल वायुमंडल में दाखिल होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि करीब एक-तिहाई हिस्सा ही पृथ्वी पर पहुंच पाता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि 80 प्रतिशत धूल संभवत: कुछ खास धूमकेतुओं से आती है। छोटी कक्षा वाले ये धूमकेतु बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नियंत्रित होते हैं। करीब 20 प्रतिशत धूल संभवत: क्षुद्रग्रहों से आती है। पृथ्वी पर गिरने वाले पारलौकिक पदार्थो का अध्ययन खगोल-भौतिकी और भू-भौतिकी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पृथ्वी पर इस समय मौजूद कई तत्व संभवत: अंतरिक्ष की चट्टानों द्वारा लाए गए थे। कुछ सिद्धांतों के अनुसार अंतरिक्ष की चट्टानों के जरिये आने वाले तत्वों और मॉलिक्यूल्स ने पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 


जनता के प्राण जाएँ पर पीएम की कर वसूली ना जाए : राहुल

जनता के प्राण जाएँ पर पीएम की कर वसूली ना जाए : राहुल

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोविड-19 वैक्सीन पर जीएसटी को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। दरअसल, केन्द्र कोविड-19 वैक्सीन पर राज्यों से पांच प्रतिशत जीएसटी ले रही है। राहुल गांधी ने इसी का विरोध किया है। इससे पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार भी वैक्सीन पर जीएसटी लगाए जाने का विरोध कर चुकी हैं।

बता दें कि देश में कोविड-19 के चलते रोज़ाना मृत्यु की संख्या बढ़ रही है। बीते 24 घंटे में 4187 लोगों की जान गई हैं। अभी तक 1 दिन में कोविड-19 की वजह से हुई यह सबसे अधिक मौतें हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में 24 घंटे के दौरान 4,01,078 आदमी कोविड-19 संक्रमित पाए गए हैं। अब तक 2 करोड़ 18 लाख 92 हजार 676 लोग कोविड-19 संक्रमित हो चुके हैं। एक दिन पहले राहुल गांधी ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखते हुए बोला था कि सरकार के पास कोविड-19 के विरूद्ध टीकाकरण को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है। उन्होंने हिंदुस्तान को अत्यधिक खतरनाक स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने यह भी बोला कि सरकार की नाकामी के चलते के कारण देश एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर के लॉकडाउन की कगार पर खड़ा हो गया है और ऐसे में गरीबों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए ताकि उन्हें गत साल की तरह पीड़ा से नहीं गुजरना पड़े।

बता दें कि एक महीने के भीतर पीएम को यह उनका दूसरा पत्र है। उन्होंने पहले 9 अप्रैल को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखा था कि टीकाकरण के लिए हर किसी को इसकी जरूरत है और टीका निर्यात पर फ़ौरन रोक लगाने का आहवान किया गया था। यदि इसी गति से टीकाकरण जारी रहा तो इकॉनमी पर विध्वंसक असर पड़ेगा।


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