देश में एक दिन में मिले 1.26 लाख से अधिक कोविड-19 केस

देश में एक दिन में मिले 1.26 लाख से अधिक कोविड-19 केस

देश में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से दशा बहुत बेकार होते जा रहे हैं। हिंदुस्तान में बुधवार को पहली बार एक दिन में कोविड-19 के 1 लाख 26 हजार 198 केस सामने आए हैं। पिछले वर्ष महामारी प्रारम्भ होने के बाद यह अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। पिछले 24 घंटे में 684 मरीजों की जान भी गई है। इस दौरान 59 हजार से अधिक लोग ठीक भी हुए हैं। कोविड-19 की सबसे अधिक मार झेल रहे महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में 59,907 नए मुद्दे सामने आए, 30,296 लोग रिकवर हुए और 322 मौतें हुई हैं।

हिंदुस्तान में अब तक कोविड-19 के एक करोड़ 29 लाख 1 हजार 785 केस हो चुके हैं। अब तक एक करोड़ 17 लाख 92 हजार 135 लोग इस वायरस को मात देकर ठीक हो गए हैं। वहीं, इस वायरस के संक्रमण से देश में अब तक एक लाख 66 हजार 177 लोगों की मृत्यु हुई है। देश में अभी 8 लाख 43 हजार 473 सक्रिय केस हैं।

कोविड-19 संक्रमितों की संख्या के हिसाब से हिंदुस्तान दुनिया का तीसरा सबसे प्रभावित देश है। दुनिया में सबसे अधिक केस प्रत्येक दिन हिंदुस्तान में ही आ रहे हैं। रिकवरी दुनिया में अमेरिका के बाद सबसे अधिक हिंदुस्तान में हुई है। मृत्यु के मुद्दे में अमेरिका, ब्राजील और मैक्सिको के बाद हिंदुस्तान का नंबर है।
आज 33 लाख लोगों को दी गई वैक्सीन की डोज
देश में 16 जनवरी को कोविड-19 का टीका लगाए जाने की अभियान की आरंभ हुई थी। 7 अप्रैल तक देशभर में 8 करोड़ 70 लाख कोविड-19 डोज दिए जा चुके हैं। बीते दिन 33 लाख 37 हजार टीके लगे। वैक्सीन की दूसरी खुराक देने का अभियान 13 फरवरी से प्रारम्भ हुआ था। 1 अप्रैल से 45 वर्ष से ऊपर से सभी लोगों को टीका लगाया जा रहा है।

कितनी है डेथ रेट और रिकवरी रेट?
देश में कोविड-19 से मौत दर 1.30 प्रतिशत है जबकि रिकवरी रेट करीब 93 प्रतिशत है। सक्रिय केस बढ़कर 6.25 प्रतिशत हो गया है। कोविड-19 सक्रिय केस मुद्दे में दुनिया में हिंदुस्तान का 5वां जगह है।

कोविड-19 से प्रभावित प्रमुख राज्यों का हाल:-

महाराष्ट्र- यहां बुधवार को 59,907 नए मरीज मिले। 30,296 मरीज ठीक हुए और 322 की मृत्यु हो गई। प्रदेश में अब तक 31.73 लाख लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 26.13 लाख लोग ठीक हुए हैं, जबकि 56,652 की मृत्यु हुई है। यहां वैसे करीब 5.01 लाख लोगों का उपचार चल रहा है।

दिल्ली- यहां बुधवार को 5,506 नए केस आए। 3,363 मरीज ठीक हुए और 20 संक्रमितों की मृत्यु हुई। यहां अब तक 6.90 लाख लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं, 6.59 लाख ठीक हुए हैं और 11,133 ने जान गंवाई है। अभी 19,455 का उपचार चल रहा है।

उत्तर प्रदेश- पिछले 24 घंटे के अंदर उत्तर प्रदेश में 5,928 नए संक्रमित मिले हैं। 30 मरीजों की मृत्यु हुई। इसके पहले पिछले वर्ष 13 सितंबर 2020 को 6,239 बीमार मिले थे। प्रदेश में सक्रिय केस बढ़कर 27,509 हो गए हैं। राजधानी लखनऊ में गुरुवार से नाइट कर्फ्यू लागू रहेगा। यह रात 9 से प्रातः काल 6 बजे तक रहेगा। यहां 15 अप्रैल तक स्कूल भी बंद रहेंगे।
गुजरात- यहां बुधवार को 3,575 नए कोविड-19 मरीज मिले। 2,217 मरीज ठीक हुए, जबकि 22 की मृत्यु हुई। प्रदेश में अब तक 3.28 लाख लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 3.05 लाख ठीक हुए हैं, जबकि 4,620 मरीजों की मृत्यु हुई है और वैसे 18,684 लोगों का उपचार चल रहा है।

पंजाब- प्रदेश में बुधवार को 2,997 नए मरीज मिले। 2,959 ठीक हुए, जबकि 63 की मृत्यु हुई। यहां अब तक 2.60 लाख लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 2.26 लाख ठीक हुए हैं, जबकि 7,278 की मृत्यु हुई है। वैसे 25,855 लोगों का उपचार चल रहा है।
अब तक कोविड-19 के 13.30 करोड़ केस?
दुनिया में अब तक 13.30 करोड़ से अधिक लोग कोविड-19 की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 28.86 लाख मरीजों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 10.72 करोड़ लोग ठीक हो गए। 2.28 करोड़ मरीजों का अभी उपचार चल रहा है। इनमें 2.27 करोड़ मरीजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं, जबकि 99,507 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है।

इस बीच ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने अगले सप्ताह से अनलॉक का दूसरा फेज प्रारम्भ करने का ऐलान किया है। सरकारी डेटा के मुताबिक, देश ने लॉकडाउन की पाबंदियां सरल करने के लिए सभी 4 टेस्ट पूरे कर लिए हैं। पाबंदियों को आगे बढ़ाने की कोई वजह नजर नहीं आती। लिहाजा अब लॉकडाउन ही एकमात्र कदम रह गया है।


पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

हर साल करीब पांच हजार टन ब्रह्मांडीय धूल पृथ्वी पर गिरती है। इसमें मुख्यत: उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के बारीक कण होते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार इस धूल की मात्र पृथ्वी पर गिरने वाली अंतरिक्ष की चट्टानों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। पृथ्वी पर हर साल करीब दस टन बड़ी चट्टानें गिरती हैं। अंतरिक्ष की धूल की भारी मात्र के बावजूद इसे खोज पाना मुश्किल होता है। बारिश की वजह से यह धूल बह जाती है और कई स्थानों पर पृथ्वी की अपनी धूल इस धूल को ढक देती है, लेकिन अंटार्कटिका में शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष की धूल को एकत्र करने का तरीका विकसित कर लिया है। 

फ्रांस के राष्ट्रीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र के भौतिकविद ज्यां दुप्रो और उनके सहयोगियों ने इस इलाके से अंतरिक्ष धूल एकत्र करने के लिए 20 वर्षो में छह अभियान आयोजित किए हैं। इस इलाके में अंतरिक्ष की धूल की परतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इन परतों के आधार पर यह अनुमान लगा सकते हैं कि हर साल अंतरिक्ष से कितनी धूल पृथ्वी पर गिरती है। शोधकर्ताओं ने इस इलाके में खाइयां खोदकर 20 किलो के बैरल में बर्फ की परतों को जमा किया। बैरल को रिसर्च स्टेशन की प्रयोगशाला में सावधानीपूर्वक बर्फ की परतों को पिघलाया। बर्फ के पिघलने के बाद बची धूल के कणों को अलग कर शोधकर्ताओं ने सुनिश्चित किया कि इन नमूनों में उनके अपने दस्तानों से किसी तरह की दूसरी मिलावट न होने पाए।


मध्य अंटार्कटिका में एकत्र किए गए बर्फ के नमूनों के विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि करीब 5,200 टन अंतरिक्ष की धूल हर साल पृथ्वी पर गिरती है। इन धूल कणों का व्यास 30 से लेकर 200 माइक्रोमीटर के बीच होता है। इस प्रकार ये सूक्ष्म कण पृथ्वी पर पारलौकिक पदार्थ के सबसे बड़े स्नोत हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट करने वाली अधिकांश अंतरिक्ष शिलाएं जल जाती हैं। इससे पृथ्वी पर गिरने वाली धूल की मात्र कम हो जाती है। हर साल करीब 15,000 टन धूल वायुमंडल में दाखिल होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि करीब एक-तिहाई हिस्सा ही पृथ्वी पर पहुंच पाता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि 80 प्रतिशत धूल संभवत: कुछ खास धूमकेतुओं से आती है। छोटी कक्षा वाले ये धूमकेतु बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नियंत्रित होते हैं। करीब 20 प्रतिशत धूल संभवत: क्षुद्रग्रहों से आती है। पृथ्वी पर गिरने वाले पारलौकिक पदार्थो का अध्ययन खगोल-भौतिकी और भू-भौतिकी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पृथ्वी पर इस समय मौजूद कई तत्व संभवत: अंतरिक्ष की चट्टानों द्वारा लाए गए थे। कुछ सिद्धांतों के अनुसार अंतरिक्ष की चट्टानों के जरिये आने वाले तत्वों और मॉलिक्यूल्स ने पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 


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