सेना की देशी पिस्टल, 100 मीटर से टारगेट होगा लॉक

सेना की देशी पिस्टल, 100 मीटर से टारगेट होगा लॉक

नई दिल्ली : केंद्र सरकार के मेड इन इंडिया के तहत रक्षा मंत्रालय और भारत की तीनों सेनाएं स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में डीआरडीओ ने आर्मी के लिए स्वदेशी बंदूक विकसित की है। जिसे आज सेना के नवाचार प्रदर्शन कार्यक्रम में रखा गया।

सेना के कार्यक्रम में मशीन पिस्तौल ASMI का प्रदर्शन
देश की पहली स्वदेशी मशीन पिस्तौल ASMI (Machine Pistol ASMI) बेहद खास है। डीआरडीओ ने इसे भारतीय की मदद से विकसित किया है। जिसका पिछले चार महीनों में परीक्षण हुआ, इस दौरान पिस्टल से 300 से ज्यादा राउंड फायर किए गए। वहीं आज भारत की पहली स्वदेशी मशीन पिस्टल एएसएमआई को सेना के नवाचार प्रदर्शन कार्यक्रम में दिखाया गया। माना जा रहा है कि जल्द ही इसे भारतीय सेना को इस्तेमाल करने के लिए दिया जाएगा।

स्वदेशी बंदूक की खासियत
ASMI पिस्तौल का पहला उद्देश्य बिना किसी दुर्घटना के टारगेट को निष्क्रिय करना है। ऐसे में इस बंदूक सेना में शामिल होने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़, जॉइंट वेंचर प्रोटेक्टिव कार्बाइन यानि JPVC एक गैस चलति सेमी ऑटोमैटिक हथियार है। 3 किलोग्राम वजनी यह हथियार 100 मीटर की रेंज तक गोलियां दाग सकता है। इसकी फायरिंग की क्षमता 700 आरपीएम की दर तक हो सकती है।

डीआरडोओ ने बनाया कार्बाइन हथियार
ASMI पिस्तौल को डीआरडोओ की पुणे स्थित लैब आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) में बनाया गया है। इसे भारतीय सेना के जीएसक्यूआर के आधार पर डिजाइन किया गया है। गौरतलब है कि ASMI पिस्तौल का पहले ही MHA ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है।

पिस्तौल को एक हाथ से चला सकते हैं जवान
इस हथियार के बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए डीआरडीओ ने बताया कि कम रेंज के ऑपरेशन्स के लिए एक खास कैलीबर हथियार है। इसकी खासियत है कि लगातार गोलीबारी के दौरान सैनिक इसे आराम से संभाल सकते है। ये इतनी हल्की है कि जवान केवल एक हाथ से भी आराम से फायरिंग कर सकते हैं।


Vaccination Target से चूका भारत, रह गया लक्ष्य अधूरा

Vaccination Target से चूका भारत, रह गया लक्ष्य अधूरा

देश में आज दुनिया के सबसे बड़े कोरोना वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत हुई। देश के सभी राज्यों में तीन हजार छह केंद्र टीकाकरण के लिए बनाये गए। इस दौरान पहले चरण में 3 लाख लोगों को टीका दिए जाने का लक्ष्य था हालंकि ये लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और एक दिन में मात्र 1 लाख 65 हजार 714 लोगों को ही वैक्सीन लग पाई।

3 लाख लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य
वैक्सीनेशन ड्राइव के पहले दिन अभियान की सफलता के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि टीकाकरण सफल रहा, हालंकि पहले दिन टीकाकरण को लेकर जो लक्ष्य तय किया गया था, वो पूरा नहीं हो सका। टीकाकरण अभियान के पहले दिन 1 लाख 65 हजार 714 लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी गयी।

1 लाख 65 हजार 714 लोगों को लगी वैक्सीन
दरअसल, 3 लाख फ्रंट लाइन वारियर्स को टीका लगाएं जाने की योजना थी, जिसके लिए 3,351 सेंटर बनाए गए थे। इन वैक्सीनेशन सेंटर पर 16,755 लोगों की ड्यूटी लगाई गई। मंत्रालय के मुताबिक, वैक्सीन लेने के बाद किसी को भी अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी।

इन वरिष्ठ लोगों को लगा टीकाः
स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया, नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल, भाजपा सांसद महेश शर्मा और पश्चिम बंगाल के मंत्री निर्मल माजी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें टीके की पहली खुराक दी गई। पॉल कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए चिकित्सा उपकरण एवं प्रबंधन को लेकर गठित अधिकार समूह के प्रमुख भी हैं। अभियान की शुरुआत से पहले राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने  कहा कि टीके की दो खुराक लेनी बहुत जरूरी है और इन दोनों के बीच लगभग एक महीने का अंतर होना चाहिए।

वहीं वैक्सीनेशन के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों संग रिव्यू मीटिंग की, जिसमें उन्होने अगले चरण में वैक्सीन सेंटर पर टीका लगाने वालों की संख्या को बढ़ाने का निर्देश दिया।

किस राज्य में कितने लोगों का वैक्सीनेशन
बिहार में 301 वैक्सीनेशन सेंटर में 16 हजार 401 लोगों को टीका लगा।

दिल्ली में 81 वैक्सीनेशन सेंटर मे 3403 लोगों को टीका लगा।

गुजरात में 8557 लोगों को टीका लगाया गया।

उत्तर प्रदेश में 370 वैक्सीनेशन सेंटर पर 15 हजार 975 लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई गई।


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