भारत को विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे की जरूरत : PM मोदी

भारत को विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे की जरूरत : PM मोदी

नई दिल्ली: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण देश में एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हों गई है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तमिलनाडु और पुडुचेरी के दौरे पर हैं, जबकि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का बंगाल दौरा है। जेपी नड्डा ने बंगाल में बीजेपी के सोनार बांग्ला मिशन की शुरुआत की। गृह मंत्री अमित शाह भी आज असम के दौरे पर हैं। बड़ी चुनावी अपडेट के लिए इस ब्लॉग के साथ बने रहें।

पुडुचेरी में अब कांग्रेस की सरकार नहीं है। बुधवार को केंद्र की अनुशंसा पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति दे दी है। ऐसा 40 सालों में पहली बार हुआ जब दक्षिण के किसी भी राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं है।

पीएम मोदी ने की कई परियोजनाओं की शुरुआत
-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुडुचेरी में कई परियोजनाओं की शुरुआत की। पीएम मोदी ने कहा कि ये राज्य ऐतिहासिक भूमि है, जिसका देश में अहम योगदान है। पीएम मोदी बोले कि जिन परियोजनाओं की शुरुआत आज की जा रही है, उससे राज्य की खूबसूरती और भी बढ़ेगी।

-पीएम मोदी ने कहा कि भारत सरकार की ओर से समुद्र के पास के इलाकों में विकास की कई परियोजनाएं चलाई गई हैं, ताकि यहां रहने वाले लोगों को अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सके।

-PM ने कहा कि पिछले सात सालों में भारत सरकार ने खेल और फिटनेस के लिए काम किया है, पुडुचेरी में भी जो एथलिट के लिए सेंटर बनाया गया है वो लोगों को मदद पहुंचाएगा।

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले कि मौजूदा वक्त में हेल्थकेयर की जरूरत बढ़ी है, इसी वजह से पुडुचेरी में आज ऐसे कई प्रोजेक्ट की शुरुआत हो रही है जो इस ओर लोगों की मदद करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि पुडुचेरी एक खास जमीन है, केंद्र की ओर से लगातार राज्य को मदद मिलती रहेगी।

दक्षिण राज्यों के दौरे पर मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो चुनावी राज्यों का दौरा करेंगे। पीएम मोदी पुडुचेरी और तमिलनाडु में होंगे, जहां पर चुनावी सभाओं के साथ-साथ कई परियोजनाओं को हरी झंडी भी दिखाई जाएगी। तमिलनाडु के कोयंबटूर में पीएम मोदी 12400 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे।


पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

पृथ्वी पर गिरती अंतरिक्ष की धूल, अंतरिक्ष चट्टानों ने निभाई जीवन के विकास में अहम भूमिका

हर साल करीब पांच हजार टन ब्रह्मांडीय धूल पृथ्वी पर गिरती है। इसमें मुख्यत: उल्कापिंडों और क्षुद्रग्रहों के बारीक कण होते हैं। एक नए अध्ययन के अनुसार इस धूल की मात्र पृथ्वी पर गिरने वाली अंतरिक्ष की चट्टानों की तुलना में बहुत ज्यादा होती है। पृथ्वी पर हर साल करीब दस टन बड़ी चट्टानें गिरती हैं। अंतरिक्ष की धूल की भारी मात्र के बावजूद इसे खोज पाना मुश्किल होता है। बारिश की वजह से यह धूल बह जाती है और कई स्थानों पर पृथ्वी की अपनी धूल इस धूल को ढक देती है, लेकिन अंटार्कटिका में शोधकर्ताओं ने अंतरिक्ष की धूल को एकत्र करने का तरीका विकसित कर लिया है। 

फ्रांस के राष्ट्रीय विज्ञान अनुसंधान केंद्र के भौतिकविद ज्यां दुप्रो और उनके सहयोगियों ने इस इलाके से अंतरिक्ष धूल एकत्र करने के लिए 20 वर्षो में छह अभियान आयोजित किए हैं। इस इलाके में अंतरिक्ष की धूल की परतें पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इन परतों के आधार पर यह अनुमान लगा सकते हैं कि हर साल अंतरिक्ष से कितनी धूल पृथ्वी पर गिरती है। शोधकर्ताओं ने इस इलाके में खाइयां खोदकर 20 किलो के बैरल में बर्फ की परतों को जमा किया। बैरल को रिसर्च स्टेशन की प्रयोगशाला में सावधानीपूर्वक बर्फ की परतों को पिघलाया। बर्फ के पिघलने के बाद बची धूल के कणों को अलग कर शोधकर्ताओं ने सुनिश्चित किया कि इन नमूनों में उनके अपने दस्तानों से किसी तरह की दूसरी मिलावट न होने पाए।


मध्य अंटार्कटिका में एकत्र किए गए बर्फ के नमूनों के विश्लेषण के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि करीब 5,200 टन अंतरिक्ष की धूल हर साल पृथ्वी पर गिरती है। इन धूल कणों का व्यास 30 से लेकर 200 माइक्रोमीटर के बीच होता है। इस प्रकार ये सूक्ष्म कण पृथ्वी पर पारलौकिक पदार्थ के सबसे बड़े स्नोत हैं। पृथ्वी के वायुमंडल में प्रविष्ट करने वाली अधिकांश अंतरिक्ष शिलाएं जल जाती हैं। इससे पृथ्वी पर गिरने वाली धूल की मात्र कम हो जाती है। हर साल करीब 15,000 टन धूल वायुमंडल में दाखिल होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि करीब एक-तिहाई हिस्सा ही पृथ्वी पर पहुंच पाता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि 80 प्रतिशत धूल संभवत: कुछ खास धूमकेतुओं से आती है। छोटी कक्षा वाले ये धूमकेतु बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नियंत्रित होते हैं। करीब 20 प्रतिशत धूल संभवत: क्षुद्रग्रहों से आती है। पृथ्वी पर गिरने वाले पारलौकिक पदार्थो का अध्ययन खगोल-भौतिकी और भू-भौतिकी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पृथ्वी पर इस समय मौजूद कई तत्व संभवत: अंतरिक्ष की चट्टानों द्वारा लाए गए थे। कुछ सिद्धांतों के अनुसार अंतरिक्ष की चट्टानों के जरिये आने वाले तत्वों और मॉलिक्यूल्स ने पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 


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