पश्चिम बंगाल में चुनाव पूर्व ही नहीं चुनाव के बाद भी होती रही है हिंसा, जानें

पश्चिम बंगाल में चुनाव पूर्व ही नहीं चुनाव के बाद भी होती रही है हिंसा, जानें

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव शुरू होने से पहले ही सत्‍ता के लिए खूनी संघर्ष की शुरुआत होती हुई दिखाई दे रही है। एक सप्‍ताह के अंदर दो राजनीतिज्ञों के ऊपर हुआ हमला इस बात की तसदीक कर रहा है। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही पश्चिम बगाल के मंत्री पर बम से जानलेवा हमला हुआ था और अब राज्‍य के भाजपा अध्‍यक्ष के ऊपर भी हमला किया गया है। इन दोनों ही हमलों के बीच चुनाव के दौर में गरमा रही सियासत है। इस बात को पश्चिम बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ भी मान रहे हैं।

राजनीतिक विश्‍लेषक शिवाजी सरकार का मानना है कि यहां पर चुनावी हिंसा का इतिहास काफी पुराना रहा है। वो हाल ही में हुई इन घटनाओं के पीछे राजनीतिक मकसद मान रहे हैं। उनका ये भी कहना है कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से चीजें हो रही हैं उससे वहां के हालात काफी गंभीर होते जा रहे हैं। उनके मुताबिक राज्‍य में जो सरकारें रहीं है या यहां के नेताओं ने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए या कुर्सी पाने के लिए इस तरह की हिंसा का सहारा लिया है। इसमें कोई भी पार्टी अछूती नहीं रही है। जहां तक राज्‍य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बात है तो उनका मानना है कि इस पार्टी की पकड़ बेहद निचले तबके में अब भी कम नहीं हुई है।


शिवाजीके मुताबिक जिस वक्‍त टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में अपना वर्चस्‍व बढ़ाना शुरू किया था उस वक्‍त उसको वाम दलों में शामिल लोगों का साथ मिला और वो टीएमसी में बड़ी संख्‍या में शामिल हुए। इस तरह से टीएमसी जिन बातों को कहकर वामदलों का विरोध करती थी वही उनका एक आधार बन गई। इसी तरह से अब राज्‍य में भाजपा की मजबूती के साथ काफी संख्‍या में टीएमसी से जुड़े लोग उससे जुड़ रहे हैं। उनके मुताबिक राज्य में हिसा की ये घटनाएं बताती हैं कि वहां पर टीएमसी बनाम टीएमसी में ही वर्चस्‍व की जंग छिड़ी है। उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल में अभी लोग चीजों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। न तो सारे लोग ममता की तरफ हैं और न ही सारे लोग भाजपा के खेमें में हैं।


उनके मुताबिक पश्चिम बंगाल की चुनावी हिंसा दरअसल, यहां पर सत्‍ता का स्‍वाद चख चुकी पार्टियों का वजूद बनाए रखने का एक तरीका बन गया है। यहां पर एक पैटर्न ये भी है कि चुनाव के बाद भी यहां पर हिंसा का दौर देखा जाता है। शिवाजी का ये भी मानना है कि इस तरह की हिंसा किसी बड़े के साथ ही नहीं बल्कि बेहद स्‍थानीय स्‍तर पर होती आई है। आने वाले समय में राज्‍य में हिंसा का दौर क्‍या रुख लेता है ये समय बताएगा।


एकसाथ सबको साधने की कोशिश, महिलाओं को मिली बड़ी सौगात

एकसाथ सबको साधने की कोशिश, महिलाओं को मिली बड़ी सौगात

चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पंजाब सरकार ने महिलाओं और छात्र—छात्राओं को बड़ा सौगात दिया है। राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए यात्रा फ्री कर दी गई है। पंजाब में महिलाओं को अब सरकारी बस से कहीं भी आने—जाने के लिए किराया नहीं देना होगा। पंजाब सरकार के इस फैसले से महिलाओं में खुशी की लहर है। इतना ही नहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भी बस यात्रा फ्री कर दी गई है। बता दें कि पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने आज 2021-22 के लिए राज्य का 1,68,015 करोड़ रुपए का बजट पेश किया।

भूमिहीनों और किसानों पर विशेष ध्यान
पंजाब सरकार के इस बजट में राज्य के 1.13 लाख किसानों का 1,186 करोड़ रुपए और भूमिहीन किसानों का 526 करोड़ रुपए का कृषि ऋण माफ करने का भी एलान किया गया है। इसी के साथ ही वित्त मंत्री ने बुजुर्ग पेंशन योजना के तहत मिलने वाली राशि को 750 रुपए से बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। वहीं शगुन योजना के तहत मिलने वाले अनुदान को 51,000 रुपए करने करने की बात है। जबकि आशीर्वाद योजना के तहत मिलने वाली राशि को 21000 रुपए से बढ़ा कर 51000 रुपए कर दिया गया है।

सरकारी कर्मचारियों को छठा वेतन का लाभ
पंजाब सरकार ने अपने इस बजट में गरीबों के साथ—साथ सरकारी कर्मचारियों का भी ख्याल रखा है। मनप्रीत सिंह बादल ने सरकारी कर्मचारियों को छठा वेतन का लाभ 1 जुलाई, 2021 से देने का एलान किया है। इतना ही नहीं इस बजट में पिछड़ों को भी साधने की पूरी कोशिश की गई है। इसी के तहत बाबा साहब भीम राव आंबडेकर की याद में भारत का दूसरा सबसे बड़ा म्यूजियम अब पंजाब में बनाया जाएगा। इस म्यूजियम को कपूरथला जिले में 27 एकड़ एरिया में बनाए जाने की योजना है। इस म्यूजियम के निर्माण के लिए सरकार ने सौ करोड़ रुपए का प्रस्ताव पास किया है।

गरीबों की पेंशन हुई दोगुनी
पंजाब सरकार गरीबों को बड़ी राहत देते हुए सरकार की तरफ से दी जाने वाली पेंशन को भी दोगुनी कर दी है। गरीबों को इसका लाभ 1 जुलाई, 2021 से मिलेगा। पहले इस पेंशन की राशि 750 रुपए प्रति माह थी जो अब 1500 रुपए मासिक कर दी गई है। वहीं छात्रों के लिए मलेरकोटला में 11861 करोड़ रुपए से नेहा कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा।

पुरस्कारों की राशि में भी हुई बढ़ोत्तरी
हेल्थ सेक्टर के लिए भी पंजाब सरकार ने 3882 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। सााि ही मुख्यमंत्री कैंसर राहत कोष के लिए 150 करोड़ रुपए दिए जाने का भी प्रस्ताव है। शिरोमणि पुरस्कार के तहत मिलने वाली राशि को 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इसी के सााि ही पंजाब साहित्य रत्न पुरस्कार की धनराशि को भी बढ़ाकर 10 लाख से 20 लाख रुपए कर दी गई है।


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