लड़कियां चेहरे पर भूलकर भी न करें इसका इस्तेमाल

लड़कियां चेहरे पर भूलकर भी न करें इसका इस्तेमाल

लड़कियां अपने चेहरे को जवां और ग्लोइंग बनाने के लिए कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती है। लेकिन कई बार लड़कियां चेहरे का रूखापन दूर करने के लिए शरीर पर लगाए जाने वाले बॉडी लोशन का इस्तेमाल करती है। इससे आपको स्किन से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

चेहरे पर बॉडी लोशन से होने वाले नुकसान: 

चेहरे की क्रीम के मुकाबले इसमें अधिक मात्रा में केमिकल्स, खूशबू औऱ कई तरह के रंग का इस्तेमाल होता है। इससे स्किन पर जलन, खुजली, रेडनेस और अधिक मात्रा में ऑयल जमा होने की परेशानी हो सकती है। 


बॉडी लोशन में अधिक मात्रा में क्रीम होने से यह चेहरे में अच्छे से नहीं समा पाता है। ऐसे में चेहरे पर बॉडी लोशन लगा रहने से धूल, मिट्टी चिपक जाने का कारण बनती है। इसी के कारण चेहरे पर गंदगी जमा हो जाती है।

इससे रोम छिद्र बंद होने लगते हैं। इसतरह रोम छिद्र बंद होने पर चेहरे पर पिंपल्स, दाग-धब्बे होने और इससे जुड़ी कई परेशानी का सामना करना पड़ता है।


चेहरे पर स्किन एलर्जी होने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए चेहरे पर बॉडी लोशन लगाने की गलती न करें।


नवंबर को है चतुर्मास की अंतिम एकादशी, इस दिन व्रत रखने से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी मां, जानें पूजा और व्रत विधि

नवंबर को है चतुर्मास की अंतिम एकादशी, इस दिन व्रत रखने से प्रसन्न होती हैं लक्ष्मी मां, जानें पूजा और व्रत विधि

Rama Ekadashi 2021: एकादशी के व्रत (Ekadashi Vrat) को सभी व्रतों में श्रेष्ठ और मुश्किल माना गया है हिंदू पंचाग के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी (Kartik Month Ekadashi) को रमा एकादशी (Rama Ekadashi) बोला जाता है सभी एकादशियों में रमा एकादशी अत्यंत जरूरी है ये चतुर्मास की अंतिम एकादशी होती है आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए लोग रमा एकादशी का व्रत (Rama Ekadashi Vrat) रखते हैं इस बार रमा एकादशी 1 नवंबर के दिन है इस दिन व्रत रखने से मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है और धन-सपंदा की प्राप्ति होती है इसलिए ही कार्तिक मास की इस एकादशी को लक्ष्मी जी (Lakshmi Ji) के नाम रमा एकादशी बोला जाता है

मान्यता है कि रमा एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के रमा स्वरूप के साथ भगवना विष्णु (Bhagwan Vishnu) के पूर्णावतार केशव स्वरूप की पूजा की जाती है एकादशी का व्रत दसवीं तिथि की शाम सूर्योदय के बाद से प्रारम्भ होकर द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद खोला जाता है रमा एकादशी का व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं


चातुर्मास की आखिरी एकादशी है रमा एकादशी (Chaturdashi Rama Ekadashi)
चतुर्मास की आखिरी एकादशी है रमा एकादशी इस समय चातुर्मास चल रहे हैं कहते हैं कि चातुर्मास के समय भगवान विष्णु आराम करने के लिए पाताल लोक चले जाते हैं और पृथ्वी की बागडोर भगवान शिव को सौंप जाते हैं चतुर्मास का समाप्ति 14 नवंबर 2021 को होगा मान्यता है कि एकादशी का व्रत हर की मानोकामनाओं को पूर्ण करता है साथ ही मोक्ष की भी प्रवृत्ति होती है


रमा एकादशी व्रत विधि (Rama Ekadashi Vrat Vidhi)

एकादशी के व्रत में नियमों का गंभीरता से पालन करना चाहिए कहते हैं तभी इस व्रत का पुण्य प्राप्त होता है एकादशी व्रत नियम के मुताबिक व्रत का शुरुआत दशमी की तिथि के समाप्ति से ही शुरुआत हो जाता है इसलिए दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए रमा एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का भी विधान है


एकादशी पूजा विधि (Ekadashi Puja Vidhi)

एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान करने के बाद साफ कपड़ें पहनें और पूजा करें पूजा में धूप, तुलसी के पत्ते, दीप, नैवेद्य, फूल और फल का इस्तेमाल करें मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु का पीले कपड़ा और फूलों से श्रृंगार करना चाहिए इसके बाद ही एकादशी की पूजा शुरुआत करें एकादशी के व्रत में रात्रि पूजा का भी विधान बताया गया है एकादशी व्रत के समय पारण के भी नियम बताए गए है नियम के मुताबिक एकादशी व्रत का पारण द्वादशी की तिथि को शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए