आज है महेश नवमी, जानें पूजा मुहूर्त एवं क्यों यह दिन है माहेश्वरी समाज के लिए महत्वपूर्ण

आज है महेश नवमी, जानें पूजा मुहूर्त एवं क्यों यह दिन है माहेश्वरी समाज के लिए महत्वपूर्ण

महेश नवमी जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह भगवान शिव से जुड़ा हुआ व्रत है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को महेश नवमी मनाई जाती है। इस वर्ष महेश नवमी आज 19 जून दिन शनिवार को है। इस असवर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है। भगवान शिव का एक नाम महेश भी है। आइए जानते हैं महेश नवमी की तिथि, पूजा मुहूर्त एवं महत्व के बारे में।

महेश नवमी 2021 तिथि मुहूर्त

हिन्दी पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारंभ 18 जून दिन शुक्रवार को रात 08 बजकर 39 मिनट से हुआ है, जिसका समापन 19 जून को शाम 06 बजकर 45 मिनट पर हो रहा है। नवमी की उदयातिथि 19 जून को प्राप्त हो रही है, ऐसे में महेश नवमी का व्रत शनिवार को रखा जाएगा। 19 जून को पूरे दिन रवि योग बना रहेगा, इसलिए इस वर्ष महेश नवमी रवि योग में मनाई जाएगी।

महेश नवमी का विशेष महत्व

महेश नवमी का एक विशेष धार्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को भगवान शिव की विशेष कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी।

महेश नवमी की पूजा

नवमी तिथि के प्रात: स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा और महेश नवमी व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक अक्षत्, चंदन, सिंदूर, भांग, बेलपत्र, मदार, गंगा जल, गाय का दूध, शहद, धूप, दीप आदि से पूजा करें। फिर मौसमी फल भी अर्पित कर दें। अब शिव चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में शिव जी की आरती करें। फिर प्रसाद वितरित करें।


बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से बन जाते हैं सारे काम, होती है बड़ी शक्ति

बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से बन जाते हैं सारे काम, होती है बड़ी शक्ति

अक्सर आप जब भी किसी बड़े काम के लिए निकले तो बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर निकलना चाहिए। अगर उनका आशीर्वाद मिल जाता है तो काम सफल हो जाता है। ऐसे में कई लोग इस बात को झूठ मानते हैं और उन्हें लगता है यह सब फ़ालतू काम है।

एक सद्गृहस्थ ऋषि के घर में बालक का जन्म हुआ. उसके ग्रह-नक्षत्रों का अध्ययन कर ऋषि ङ्क्षचतित हो उठे। ग्रह के अनुसार बालक अल्पायु होना चाहिए था। उन्होंने अपने गुरुदेव से उपाय पूछा। उन्होंने कहा, ''यदि बालक वृद्धजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करता रहे तो ग्रह-नक्षत्र बदलने की संभावना हो सकती है। ''एक बार संयोग से उधर सप्त ऋषि आ निकले।

उसने सप्त ऋषियों को हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। सप्त ऋषियों ने बालक की विनम्रता से गद्गद होकर आशीर्वाद दिया 'आयुष्मान भव'-दीर्घ जीवी हो। सप्त ऋषियों ने उसे आशीर्वाद तो दे दिया पर उसी क्षण वे समझ गए कि यह ऋषि पुत्र तो अल्पायु है परंतु उन्होंने इसे दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद दे दिया है।

अब उनका वचन असत्य निकला तो क्या होगा। अचानक ब्रह्मा जी ने उनका संशय दूर करते हुए कहा, ''वृद्धजनों का आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली होता है। इस बालक ने असंख्य वृद्धजनों से दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद प्राप्त कर अल्पायु होने वाले ग्रहों को बदल डाला है।