शरीर पर बने तिल खोलते हैं आपकी जिदंगी के गहरे राज, जानकर हो जाएंगे हैरान

शरीर पर बने तिल खोलते हैं आपकी जिदंगी के गहरे राज, जानकर हो जाएंगे हैरान

हर किसी का चेहरा, रंग व रुप दूसरे से अलग होता है। ऐसे में शरीर पर तिल भी मौजूद होते हैं। मगर कुछ खास जगह पर पड़े तिल सुंदरता बढ़ाने के साथ वर्तमान व आने वाले कल के बारे में बयां करते हैं। जी हां, सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, तो चलिए आज हम आपको इन तिल का मतलब बताते हैं..

माथे के बीच तिल
माथे के ठीक बीच तिल सुख व समृद्धि का प्रतीक कहलाता है। ऐसी लड़कियों की मन की सभी इच्छाें जल्दी पूरी हो जाती है। ये एक बार जिस चीज को पाने की सोचते हैं, उसे हासिल करके ही मानते हैं।

गर्दन पर तिल
कई लड़कियों के गर्दन पर काले व भूरे रंग का तिल या निशान होता है। ऐसी लड़कियां हमेशा आराम से जिंदगी जीना पसंद करती है। सात ही इन्हें जीवन में बहुत कम परेशानियां झेलने पड़ती है। ऐसे में ये लड़कियां हंसी-खुशी से जिंदगी बीताती है।

दाहिने पैर पर तिल
दाहिने पैर पर तिल वाली लड़कियां तेज दिमाग की मालिक होती है। ऐसे में ये जीवन में जल्दी ही सफलता को पाती है। ये हर चीज व परिस्थिति को आसानी से समझने कर उसका हल निकाल लेती है। साथ ही इन लड़कियों के विदेशों में घूमने की संभावना ज्यादा होती है।

बाहिने पैर पर तिल
जिन लड़कियों के बाहिने पैर पर तिल होता है वे बेहद ही खर्चीली होती है। ये जरूरत से ज्यादा अपने शौंक को मायने देती है। ऐसे में ये लड़कियां एक बार जो चीज पसंद आ जाए उसके आगे पैसे भी नहीं देखते हैं। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, इन्हें अपने इस नेचर में थोड़ा बदलाव लाने की जरूरत है।

बाजू पर तिल
बात हम दाहिने बाजू पर तिल की करें तो ऐसी लड़कियां बेहद ही संस्कारी होती है। ये अपने बातों व खुशमिजाज नेचर से सामने वाले को जल्दी ही इंप्रेस कर देती है। ऐसे में हर कोई इन्हें पसंद करने के साथ इनका दोस्त बनने की इच्छा रखता है। वहीं बाई बाजू पर तिल वाली महिलाओं को संतान सुख मिलता है। साथ ही ये सुख व खुशी से जीवन बीताती है।

कान पर तिल
कान पर तिल वाली लड़कियां बेहद ही तेज दिमाग व एक्टिव होती है। मगर इन्हें हमेशा हैल्दी रहने के लिए खुद का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।

नाक पर तिल
नाक पर तिल वाली लड़कियां अलग-अलग जगह पर घूमने का मजा लेते हैं। ऐसे में इनका जीवन घूमते फिरते ही बीतता है।


दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

कई बार हम स्वयं की दूसरे से तुलना करके अपने अंदर हीन भावना को जन्म देते हैं, जो अंदर ही अंदर हमें खोखला करने लगती है। हम अपने गुणों से ज्यादा अपने अवगुणों पर ध्यान देने लगते हैं और गुणों को देख ही नहीं पाते। एक समय आता है कि हम सोचने लगते हैं कि हमारा जीवन तो व्यर्थ ही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर व्यक्ति का अपना गुण है, उसका अपना एक महत्व है। दूसरे से तुलना करके अपने महत्व को खत्म होने बचाएं। आइए पढ़ते हैं गुलाब के पत्ते की एक प्रेरक कथा, जिसके महत्व को एक चींटी समझाती है।

पहचानें अपने गुणों को

एक समय की बात है। एक सरोवर के तट पर एक बगीचा था। इसमें तमाम तरह के गुलाब के पौधे थे। लोग वहां आते, तो वे वहां खिले गुलाब के फूलों की तारीफ करते। एक बार एक बहुत सुंदर गुलाब के पौधे के एक पत्ते के भीतर यह विचार जन्मा कि सभी लोग फूल की ही तारीफ करते हैं, पत्ते की कोई तारीफ नहीं करता। इसका मतलब है कि मेरा जीवन व्यर्थ है। पत्ते के अंदर हीन भावना घर करने लगी और वह मुरझाने लगा।

एक दिन बहुत तेज तूफान आया। जितने भी फूल थे, वे पंखुड़ी-पंखुड़ी होकर हवा के साथ न जाने कहां चले गए। चूंकि पत्ता अपनी हीनभावना से मुरझा कर कमजोर पड़ गया था, इसलिए वह भी टूटकर, उड़कर सरोवर में जा पड़ा। पत्ते ने देखा कि सरोवर में एक चींटी भी आकर गिर पड़ी थी और वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

चींटी को थकान से बेदम होते देख पत्ता उसके पास आ गया और उससे कहा-घबराओ मत, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ। चींटी पत्ते पर बैठ गई और सही-सलामत किनारे तक आ गई। चींटी इतनी कृतज्ञ हो गई कि पत्ते की तारीफ करने लगी। उसने कहा - मुझे तमाम पंखुडि़यां मिलीं, लेकिन किसी ने भी मेरी मदद नहीं की, लेकिन आपने तो मेरी जान बचा ली। आप बहुत ही महान हैं।

यह सुनकर पत्ते की आंखों में आंसू आ गए। वह बोला-धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए कि तुम्हारी वजह से मैं अपने गुणों को जान सका। अभी तक तो मैं अपने अवगुणों के बारे में ही सोच रहा था, लेकिन आज अपने गुणों को पहचानने का अवसर मिला।

कथा का सार

किसी से तुलना करके हीन भावना पैदा करने के बजाय सक्रिय होकर अपने भीतर के गुणों को पहचानना चाहिए।


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