डार्क सर्कल्स से हैं परेशान तो ये घरेलू नुस्खे आएंगे बहुत काम

डार्क सर्कल्स से हैं परेशान तो ये घरेलू नुस्खे आएंगे बहुत काम

ज कल डार्क सर्कल या आंखों के नीचे काले घेरे होना एक सामान्य परेशानी है। ये महिला एवं पुरुष किसी को भी हो सकती है। इसके चलते त्वचा सुस्त एवं बेजान हो जाती है। ये परेशानी ज्यादा तनाव लेने, अनीमिया, एजिंग, आंखों पर ज्यादा जोर पड़ना, धूप, थकान, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी और अधिक टेलीविज़न देखने आदि से हो सकती है। आइए जानें कि डार्क सर्कल को ठीक करने के लिए घरेलू उपाय क्या है...

- डार्क सर्कल को ठीक करने के लिए आप आलू को छिलके समेत पीसकर इसका पेस्ट बना सकते हैं। इसे आप 10 से 15 मिनट आंखों के नीचे लगाएं तथा फिर ठंडे जल से धो लें।

- खीरे एवं दही का पेस्ट बनाकर आप आंखों के नीचे लगाएं तथा सूखने के पश्चात् साफ पानी से धो लें। इस पैक का उपयोग करने के पश्चात् आप इस पर थोड़ा सा बादाम का तेल लगा सकते हैं। इसे आप सप्ताह में 3 से 4 बार लगा सकते हैं।

- नींबू एवं पुदीने के रस को एक गिलास पानी में डालें तथा इसमें एक टमाटर का रस भी मिक्स कर लें। इसका सेवन आप प्रतिदिन कर सकते हैं। ये डार्क सर्कल कम करने में सहायता करेगा।

- कॉटन को ठंडे दूध में भिगो कर आंखों पर 10 से 15 मिनट रखें। तत्पश्चात चेहरा धो लें।

- ग्रीन टी बैग भी डार्क सर्कल के लिए लाभदायक है। इसके लिए आपको ग्रीन टी बैग को फ्रीज में रखना होगा। कुछ समय पश्चात् इसे निकालकर आंखों के ऊपर रख लें। इसे 10 से 15 मिनट रख सकते हैं। ऐसा आप सप्ताह में 2 से 3 बार कर सकते हैं।


दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

कई बार हम स्वयं की दूसरे से तुलना करके अपने अंदर हीन भावना को जन्म देते हैं, जो अंदर ही अंदर हमें खोखला करने लगती है। हम अपने गुणों से ज्यादा अपने अवगुणों पर ध्यान देने लगते हैं और गुणों को देख ही नहीं पाते। एक समय आता है कि हम सोचने लगते हैं कि हमारा जीवन तो व्यर्थ ही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर व्यक्ति का अपना गुण है, उसका अपना एक महत्व है। दूसरे से तुलना करके अपने महत्व को खत्म होने बचाएं। आइए पढ़ते हैं गुलाब के पत्ते की एक प्रेरक कथा, जिसके महत्व को एक चींटी समझाती है।

पहचानें अपने गुणों को

एक समय की बात है। एक सरोवर के तट पर एक बगीचा था। इसमें तमाम तरह के गुलाब के पौधे थे। लोग वहां आते, तो वे वहां खिले गुलाब के फूलों की तारीफ करते। एक बार एक बहुत सुंदर गुलाब के पौधे के एक पत्ते के भीतर यह विचार जन्मा कि सभी लोग फूल की ही तारीफ करते हैं, पत्ते की कोई तारीफ नहीं करता। इसका मतलब है कि मेरा जीवन व्यर्थ है। पत्ते के अंदर हीन भावना घर करने लगी और वह मुरझाने लगा।

एक दिन बहुत तेज तूफान आया। जितने भी फूल थे, वे पंखुड़ी-पंखुड़ी होकर हवा के साथ न जाने कहां चले गए। चूंकि पत्ता अपनी हीनभावना से मुरझा कर कमजोर पड़ गया था, इसलिए वह भी टूटकर, उड़कर सरोवर में जा पड़ा। पत्ते ने देखा कि सरोवर में एक चींटी भी आकर गिर पड़ी थी और वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

चींटी को थकान से बेदम होते देख पत्ता उसके पास आ गया और उससे कहा-घबराओ मत, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ। चींटी पत्ते पर बैठ गई और सही-सलामत किनारे तक आ गई। चींटी इतनी कृतज्ञ हो गई कि पत्ते की तारीफ करने लगी। उसने कहा - मुझे तमाम पंखुडि़यां मिलीं, लेकिन किसी ने भी मेरी मदद नहीं की, लेकिन आपने तो मेरी जान बचा ली। आप बहुत ही महान हैं।

यह सुनकर पत्ते की आंखों में आंसू आ गए। वह बोला-धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए कि तुम्हारी वजह से मैं अपने गुणों को जान सका। अभी तक तो मैं अपने अवगुणों के बारे में ही सोच रहा था, लेकिन आज अपने गुणों को पहचानने का अवसर मिला।

कथा का सार

किसी से तुलना करके हीन भावना पैदा करने के बजाय सक्रिय होकर अपने भीतर के गुणों को पहचानना चाहिए।


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