शनिवार को न करें ये काम, शनि देव हो सकते हैं नाराज

शनिवार को न करें ये काम, शनि देव हो सकते हैं नाराज

शनिवार के कारक देवता शनि देव या शनि ग्रह हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शनि देव या हनुमान जी की पूजा करने से आपकी कुण्डली का शनि दोष समाप्त हो जाता है। शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है। वो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार अच्छे कर्म का अच्छा फल तथा बुरे कार्मों का बुरा फल प्रदान करते हैं। परन्तु कई बार हम से अंजाने में कई ऐसे कार्य हो जाते हैं, जिनके कारण हमें बुरे फल भुगतने पड़ते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे कार्यों के बारे में बताएंगे, जिनसे शनि देव नाराज हो जाते हैं, कोशिश करें कि ऐसे कार्य न करें।

1. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार को सरसों का तेल का दान करना या उसका दिया जलाना लाभदायक होता है। परन्तु इस दिन सरसों का तेल खरीदकर घर में नहीं लाना चाहिए और न ही दुकान से खरीदना चाहिए। पहले से खरीद कर रखे हुए तेल का ही उपयोग करना चाहिए।

2. शनिवार को लोग सरसों के तेल के साथ काला तिल भी दान करते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि तेल की ही तरह काला तिल भी शनिवार को नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होने के बजाए नाराज हो सकते हैं।

3. शनिवार को लोहा या लोहे से बने समान नहीं खरीदना चाहिए। इस दिन लोहे का दान करना उचित है, परन्तु खरीदना उचित नहीं माना जाता है।

4. शनिवार को जूते-चप्पल का दान करने से शनि के दोष दूर होते हैं, परन्तु ध्यान रखें कि इस दिन किसी व्यक्ति से जूते-चप्पल का उपहार न लें और न ही दें।

5. गरीब, कमजोर या वृद्ध का अपमान नहीं करना चाहिए, न ही उन्हें परेशान करना चाहिए। ऐसा करने वाले व्यक्ति से शनि देव कभी प्रसन्न नहीं होते हैं।

6. शनिवार के दिन उत्तर और पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, ये आपके जीवन में कष्ट का कारण बन सकती है।


बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से बन जाते हैं सारे काम, होती है बड़ी शक्ति

बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से बन जाते हैं सारे काम, होती है बड़ी शक्ति

अक्सर आप जब भी किसी बड़े काम के लिए निकले तो बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर निकलना चाहिए। अगर उनका आशीर्वाद मिल जाता है तो काम सफल हो जाता है। ऐसे में कई लोग इस बात को झूठ मानते हैं और उन्हें लगता है यह सब फ़ालतू काम है।

एक सद्गृहस्थ ऋषि के घर में बालक का जन्म हुआ. उसके ग्रह-नक्षत्रों का अध्ययन कर ऋषि ङ्क्षचतित हो उठे। ग्रह के अनुसार बालक अल्पायु होना चाहिए था। उन्होंने अपने गुरुदेव से उपाय पूछा। उन्होंने कहा, ''यदि बालक वृद्धजनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करता रहे तो ग्रह-नक्षत्र बदलने की संभावना हो सकती है। ''एक बार संयोग से उधर सप्त ऋषि आ निकले।

उसने सप्त ऋषियों को हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। सप्त ऋषियों ने बालक की विनम्रता से गद्गद होकर आशीर्वाद दिया 'आयुष्मान भव'-दीर्घ जीवी हो। सप्त ऋषियों ने उसे आशीर्वाद तो दे दिया पर उसी क्षण वे समझ गए कि यह ऋषि पुत्र तो अल्पायु है परंतु उन्होंने इसे दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद दे दिया है।

अब उनका वचन असत्य निकला तो क्या होगा। अचानक ब्रह्मा जी ने उनका संशय दूर करते हुए कहा, ''वृद्धजनों का आशीर्वाद बहुत शक्तिशाली होता है। इस बालक ने असंख्य वृद्धजनों से दीर्घजीवी होने का आशीर्वाद प्राप्त कर अल्पायु होने वाले ग्रहों को बदल डाला है।