गुस्सा करने की जगह पर हमेशा खुश रहने में विश्वास रखती है ये लड़कियां

गुस्सा करने की जगह पर हमेशा खुश रहने में विश्वास रखती है ये लड़कियां

कई लोगों को हर बात पर गुस्सा जल्दी आ जाता है। ऐसे में जल्दी ही सामने वाले से लड़ने लगते हैं। मगर इसी के विपरित कई लोग शांत मन से चीजों को सुलझाने में विश्वास रखते हैं। इनका मानना होता है कि गुस्सा किसी भी समस्या का हल नहीं हैं। असल में ये काम को औ भी खराब करता है। इनके इस नेचर का कारण इनपर इनकी राशि पर पड़ा असर होता है। तो चलिए आज हम आपको राशि के हिसाब से शांत नेचर की लड़कियों के बारे में बताते हैं। ये लड़कियां गुस्सा करने की जगह पर हमेशा खुश रहने में विश्वास रखती है।

कन्या राशि
इस राशि की लड़कियां केयरिंग व दयालु नेचर की होती है। ऐसे में हर बात को सोच-समझ कर बोलती है। ये लड़ाई-झगडे़ से दूर रहने का ध्यान रखते हैं। हालांकि इन्हें गुस्सा भी गुस्सा आता है। मगर ये किसी से लड़ने की जगह जल्दी ही अपने गुस्सा शांत कर लेती है। ऐसे में ये हर परिस्थिति जल्दबाजी की जगह शांत मन से फैसला लेती है।


तुला राशि
इस राशि की लड़कियों को हर किसी के साथ सही तरीके से रहना पसंद लगता है। ऐसे में ये किसी से लड़ने की जगह प्यार से बातों को सुलझाना सही समझती है। ये अपने केयरिंग, खुशमिजाज नेचर से हर किसी के साथ बना कर रखती है। साथ ही ये अपने शांत नेचर से भी दूसरों से अपीन बात मनवाने में माहिर होती है। इनका मानना है कि गुस्सा काम को बिगाड़ता है। शांति व मिलकर किया काम जल्दी और सही होता है।

कुंभ राशि
इस राशि की लड़कियां भावुक व केयरिंग नेचर की होती है। ऐसे में ये लड़ने की जगह शांति से बात सुलझाने में विश्वास रखती है। ये खुद को किसी भी परिस्थिति में ढालने में सक्षम होती है। ऐसे में ये लड़कियां घर हो या ऑफिस दोनों में बखूबी तालमेल बना कर रखती है। मगर ऐसी नहीं है कि इन्हें किसी बात का बुरा ना लगे। असल में किसी को दुख पहुंचाने की जगह बात खत्म करना सही समझती है।

मीन राशि
ये लड़कियां खुद से पहले दूसरे का सोचती है। साथ ही खुशमिजाज, शांत व केयरिंग नेचर से जल्दी से सामने वाले को इंप्रेस कर लेती है। ये जिस तरह स्वतंत्र रहना पसंद करती है। ठीक उसी तरह दूसरों की जिंदगी में झांकना इन्हें अच्छा नहीं लगता है। इनका मानना है कि लड़ाई किसी भी परेशानी का हल नहीं होता है। ऐसे में ये सीधी बातें करने में विश्वास रखती है।


दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

दूसरे से तुलना कर खुद को हीन न समझें, पढ़ें गुलाब के पत्ते की प्रेरक कथा

कई बार हम स्वयं की दूसरे से तुलना करके अपने अंदर हीन भावना को जन्म देते हैं, जो अंदर ही अंदर हमें खोखला करने लगती है। हम अपने गुणों से ज्यादा अपने अवगुणों पर ध्यान देने लगते हैं और गुणों को देख ही नहीं पाते। एक समय आता है कि हम सोचने लगते हैं कि हमारा जीवन तो व्यर्थ ही है, लेकिन ऐसा नहीं है। हर व्यक्ति का अपना गुण है, उसका अपना एक महत्व है। दूसरे से तुलना करके अपने महत्व को खत्म होने बचाएं। आइए पढ़ते हैं गुलाब के पत्ते की एक प्रेरक कथा, जिसके महत्व को एक चींटी समझाती है।

पहचानें अपने गुणों को

एक समय की बात है। एक सरोवर के तट पर एक बगीचा था। इसमें तमाम तरह के गुलाब के पौधे थे। लोग वहां आते, तो वे वहां खिले गुलाब के फूलों की तारीफ करते। एक बार एक बहुत सुंदर गुलाब के पौधे के एक पत्ते के भीतर यह विचार जन्मा कि सभी लोग फूल की ही तारीफ करते हैं, पत्ते की कोई तारीफ नहीं करता। इसका मतलब है कि मेरा जीवन व्यर्थ है। पत्ते के अंदर हीन भावना घर करने लगी और वह मुरझाने लगा।

एक दिन बहुत तेज तूफान आया। जितने भी फूल थे, वे पंखुड़ी-पंखुड़ी होकर हवा के साथ न जाने कहां चले गए। चूंकि पत्ता अपनी हीनभावना से मुरझा कर कमजोर पड़ गया था, इसलिए वह भी टूटकर, उड़कर सरोवर में जा पड़ा। पत्ते ने देखा कि सरोवर में एक चींटी भी आकर गिर पड़ी थी और वह अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी।

चींटी को थकान से बेदम होते देख पत्ता उसके पास आ गया और उससे कहा-घबराओ मत, तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ। चींटी पत्ते पर बैठ गई और सही-सलामत किनारे तक आ गई। चींटी इतनी कृतज्ञ हो गई कि पत्ते की तारीफ करने लगी। उसने कहा - मुझे तमाम पंखुडि़यां मिलीं, लेकिन किसी ने भी मेरी मदद नहीं की, लेकिन आपने तो मेरी जान बचा ली। आप बहुत ही महान हैं।

यह सुनकर पत्ते की आंखों में आंसू आ गए। वह बोला-धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए कि तुम्हारी वजह से मैं अपने गुणों को जान सका। अभी तक तो मैं अपने अवगुणों के बारे में ही सोच रहा था, लेकिन आज अपने गुणों को पहचानने का अवसर मिला।

कथा का सार

किसी से तुलना करके हीन भावना पैदा करने के बजाय सक्रिय होकर अपने भीतर के गुणों को पहचानना चाहिए।


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