आइब्रो की ग्रोथ कम है तो इन देसी नुस्खों से बनाएं काली घनी आइब्रो

आइब्रो की ग्रोथ कम है तो इन देसी नुस्खों से बनाएं काली घनी आइब्रो

जिस तरह सिर पर काले घने बाल हमारी पर्सनेलिटी में निखार लाते हैं, उसी तरह घनी आइब्रो भी चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने में अहम किरदार निभाती हैं। कुछ लड़किया बाल झड़ने से परेशान रहती हैं, तो कुछ आइब्रो के बाल कम होने की वजह से परेशान रहती हैं। आइब्रों के बाल कम होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे एलर्जी, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर या फंगल संक्रमण। अगर आपकी भी आइब्रो कम हो रही हैं तो हम आपको कुछ घरेलू बेस्ट उपायों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपना कर आप अपनी आइब्रो के बालों की ग्रोथ बढ़ा सकती हैं।

ऑलिव ऑइल से करें मसाज

अगर आइब्रो कम हो गई है तो रोज रात को सोने से पहले आइब्रो पर ऑलिव ऑइल लगाकर करीब 5 से 10 मिनट तक मसाज करें। इस तेल की मसॉज से आपकी आइब्रों की ग्रोथ बढ़ जाएगी।

एलोवेरा जेल से करें मसाज

घनी और काली आइब्रो जल्द ही करना चाहती हैं तो एलोवेरा जेल लगाएं। थोड़ा-सी एलोवेरा जेल से दिन में दो बार हल्की मसाज करने से आईब्रो घनी हो जाती हैं।

कच्चे दूध से बढ़ाएं आइब्रो की ग्रोथ

एक चम्मच कच्चा दूध रुई की मदद से आइब्रो पर लगाएं। आईब्रो की ग्रोथ बढ़ाने के लिए और आइब्रों को काला और शाइनी बनाने के लिए दूध की मसाज करें।

नारियल का तेल आइब्रों के लिए मुफीद

औषधीय गुणों से भरपूर नारियल तेल के जितने फायदे आपके सर के बालों के लिए है उतने ही आइब्रों के लिए भी है। मोटी और काली आइब्रो पाना चाहती है तो नारियल तेल से मसॉज करें।

प्याज का रस

प्याज का रस बालों की ग्रोथ के लिए बहुत अच्छा होता है। हर रोज दिन में एक बार प्याज का रस आईब्रो पर लगाने से ये जल्दी काली और घनी बनती हैं।


इस दिन मांं करें निर्जला उपवास, संतान को मिलेगा लंबी उम्र का वरदान

इस दिन मांं करें निर्जला उपवास, संतान को मिलेगा लंबी उम्र का वरदान

माघ मास के गणेश चतुर्थी व्रत का बहुत महत्व है। वैसे तो हर महीने दो गणेश चतुर्थी आती हैं, लेकिन माघ माह में चतुर्थी को बहुत खास माना गया है। माघ महीने के गणेश चतुर्थी को सकट, तिलवा  और तिलकुटा चौथ का व्रत कहते है।  इस बार सकट व्रत का पूजन 31 जनवरी यानि कि दिन रविवार  को होगा। ये व्रत महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए करती है। पहले ये व्रत पुत्र के लिए किया जाता रहा है, लेकिन अब बेटियों के लिए भी व्रत किया जाने लगा है।

मुहूर्त
पंचाग के अनुसार , पंचांग के अनुसार 31 जनवरी 2021 को  08:24 रात को चतुर्थी तिथि शुरू होगी और 01 फरवरी 202 1 को  शाम 06:24 बजे समाप्त होगी।

वक्रतुंडी चतुर्थी, माघी चौथ अथवा तिलकुटा चौथ भी इसी को कहते हैं। सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद उत्तर दिशा की ओर मुंह कर गणेश जी को नदी में 21 बार, तो घर में एक बार जल देना चाहिए। सकट चौथ संतान की लंबी आयु हेतु किया जाता है। चतुर्थी के दिन मूली नहीं खानी चाहिए, धन-हानि की आशंका होती है। देर शाम चंद्रोदय के समय व्रती को तिल, गुड़ आदि का अर्घ्य चंद्रमा, गणेश जी और चतुर्थी माता को अवश्य देना चाहिए। अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस दिन स्त्रियां निर्जल व्रत करती हैं। सूर्यास्त से पहले गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा-पूजा होती है। इस दिन तिल का प्रसाद खाना चाहिए। दूर्वा, शमी, बेलपत्र और गुड़ में बने तिल के लड्डू चढ़ाने चाहिए।

कैसे करते है व्रत?
* कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
*  इस दिन गणपति का पूजन किया जाता है।
*  महिलाएं निर्जल रहकर व्रत रखती हैं।
* शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
* ये व्रत करने से  दु:ख दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं

क्या है महत्व?
* 12 मास में आने वाली चतुर्थी  में माघ की चतुर्थी का सबसे अधिक महत्व है।
* पुराणों के अनुसार, गणेश जी ने इस दिन शिव- पार्वती की परिक्रमा की थी।
* परिक्रमा कर माता-पिता से श्रीगणेश ने प्रथम पूज्य का आशीर्वाद का पाया था।
* इस दिन 108 बार ‘ ऊँ गणपतये नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
*  तिल और गुड़ का लड्डू श्री गणेश को चढ़ाने से रुके काम बनते हैं।
*  इस दिन गणेश के साथ शिव और कार्तिकेय की भी पूजा कर कथा सुनी जाती है।
 

सत्ययुग में महाराज हरिश्चंद्र के नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया, पर आवां पका ही नहीं। बार-बार बर्तन कच्चे रह गए। बार-बार नुकसान होते देख उसने एक तांत्रिक से पूछा, तो उसने कहा कि बलि से ही तुम्हारा काम बनेगा। तब उसने तपस्वी ऋषि शर्मा की मृत्यु से बेसहारा हुए उनके पुत्र की सकट चौथ के दिन बलि दे दी।

उस लड़के की माता ने उस दिन गणेश पूजा की थी। बहुत तलाशने पर जब पुत्र नहीं मिला, तो मां ने भगवान गणेश से प्रार्थना की। सवेरे कुम्हार ने देखा कि वृद्धा का पुत्र तो जीवित था। डर कर कुम्हार ने राजा के सामने अपना पाप स्वीकार किया। राजा ने वृद्धा से इस चमत्कार का रहस्य पूछा, तो उसने गणेश पूजा के विषय में बताया। तब राजा ने सकट चौथ की महिमा को मानते हुए पूरे नगर में गणेश पूजा करने का आदेश दिया। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है।


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