सार्वजनिक पार्कों में घूम रहीं महिलाएंं व बच्चे, एक माह पहले अफगानिस्तान में काबिज हुआ था तालिबान

सार्वजनिक पार्कों में घूम रहीं महिलाएंं व बच्चे, एक माह पहले अफगानिस्तान में काबिज हुआ था तालिबान

समूचे अफगानिस्तान पर तालिबान को काबिज होने के एक माह बाद अफगानिस्तान के लोगों को सार्वजनिक स्थानों और पार्क में घूमते हुए देखा गया। वर्ष 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान में तालिबान के शासन में  बड़े पैमाने पर महिलाओं पर पाबंदी थी। उन्हें सार्वजनिक जीवन से बाहर रखा गया था। उस वक्त महिलाओं के घर से बाहर अकेेेले निकलने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया था। बगैर किसी पुरुष रिश्तेदार के कोई महिला घर से बाहर नहीं जा सकती थी। 

अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद आज देश के चार बम धमाके हुए। इसमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक जख्मी हैं। पूर्वी नांगरहार की राजधानी जलालाबाद में तालिबान के वाहनों को निशाना बनाकर धमाका किया गया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें कुछ की हालत गंभीर है। काबुल के PD13 में एक विस्फोट में 2 लोगों के घायल होने की खबर है।


अगस्त में अफगानिस्तान पर कब्जा जमाने वाला तालिबान वहां के घर-घर जाकर उन अफगान नागरिकों की तलाश कर रहा है जिन्होंने विदेशी सैनिकों की मदद की थी। इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र भी चेतावनी जारी कर चुका है। आतंकियों ने इन लोगों के परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी है।

बीते दिनों जलालाबाद में स्थानीय नागरिकों ने तालिबान के झंडे की जगह अफगानिस्तानी झंडा फहराया और समूह के विरोध में मार्च किया। तालिबान ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए उन पर गोलियां बरसाई जिसमें एक व्यक्ति और एक किशोर घायल हो गए। अफगान झंडे के साथ कई जिलों में लोगों को तालिबान का विरोध करते हुए देखा गया। खास बात यह कि इस विरोध में महिलाएं भी शामिल रहीं जो अफगान झंडे के साथ प्रदर्शन करते हुए नारा लगा रही थीं- हमारा झंडा हमारी पहचान है।


CPEC की मुश्किलों को लेकर गंभीर नहीं पाकिस्तान? चीनी निवेशकों के भागने का खतरा बढ़ा

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इस्लामाबाद
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की पहले चरण के प्रॉजेक्ट्स पर अब भी ग्रहण के बादल लगे हुए हैं. इमरान खान सरकार अब तक चाइना की कंपनियों और निवेशकों के साथ प्रॉजेक्ट्स में आ रही अड़चनों को दूर नहीं कर पाई है. परियोजनाओं में हो रही देरी के बाद अब पूरे पर ही सवालिया निशान लगने लगा है. हाल में ही पाक चाइना रिलेशन स्टियरिंग कमेटी की मीटिंग आयोजित की गई थी. इसमें पाया गया कि पाक सरकार ने अधिकतर दिशा-निर्देशों को लागू नहीं किया है.


बिजली परियोजनाओं के लिए खड़ी हुई मुश्किलें
इस मीटिंग में पाक का अगुवाई फेडरल मिनिस्टर ऑफ प्लानिंग, डेवलपमेंट एंड स्पेशल इनिशिएटिव असद उमर ने की थी. बुधवार को हुई मीटिंग में शामिल लोगों के मुताबिक, पाक के ऊर्जा मंत्रालय ने संचालन समिति के दिए गए आदेशों को अबतक लागू नहीं किया है. अपनी पिछली मीटिंग में पाक सरकार ने 3,600 मेगावाट की उत्पादन क्षमता वाली पांच सीपीईसी बिजली परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन प्रारम्भ करने में देरी से निपटने के लिए एक नीति तैयार करने के लिए पावर डिवीजन के लिए अगस्त के अंत की समय सीमा तय की थी.




अब अगली मीटिंग में होगा अंतिम फैसला
ऊर्जा मंत्रालय को इस मामले को हल करने के लिए ऊर्जा पर कैबिनेट समिति को नीति प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था. पाकिस्तानी योजना मंत्रालय के बयान में बताया गया है कि बिजली विभाग ने समिति को सूचित किया कि छह बिजली परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन की दिनांक के विस्तार का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं. अब इसे लेकर अगली मीटिंग में कोई फैसला लिया जा सकता है.




सीपीईसी बना चाइना के गले की फांस
चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अब ड्रैगन के गले की फांस बन गया है. अरबों का पैसा लगाने के बाद भी चाइना को वह लाभ नहीं मिल रहा है जिसके लिए उसने 60 अरब US डॉलर का निवेश किया था. पाक में इसे लेकर पॉलिटिक्स भी चरम पर है. वहीं करप्शन में डूबे पाकिस्तानी नेता सड़क निर्माण काम में कोताही भी बरत रहे हैं.