पेरिस आतंकी हमले के 20 के खिलाफ सुनवाई शुरू, भरी अदालत में आरोपित बोला...

पेरिस आतंकी हमले के 20 के खिलाफ सुनवाई शुरू, भरी अदालत में आरोपित बोला...

फ्रांस की राजधानी स्थित 13वीं सदी के कोर्ट रूम में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) के पेरिस में किए 2015 के आतंकी हमले के बीस आरोपितों के खिलाफ बुधवार को सुनवाई शुरू हो गई है। आरोपितों में से एक आइएस आतंकी ने सुनवाई में खुद को इस्लामिक स्टेट का सैनिक बताया है। आतंकी संगठन आइएस के हमले में 130 लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे।

इन आरोपितों में से एक मोरक्कन मूल के फ्रेंच नागरिक सलाह अब्देसलाम ने अदालत में काले लिबास में पेश होकर कहा कि वह इस्लामिक स्टेट का सिपाही है। फ्रांस के नेशनल साकर स्टेडियम, बाटाक्लैन कांसर्ट हाल और छह रेस्त्रां व बार में आत्मघाती हमले में शामिल बीस आरोपितों में से एक अब्देसलाम (31) से सुनवाई की शुरुआत में उसका पेशा पूछा गया। जवाब में उसने कहा कि उसने इस्लामिक स्टेट का सैनिक बनने के लिए नौकरी छोड़ दी थी।

उसने कहा कि अल्लाह के अलावा दूसरा कोई ईश्वर नहीं है और मुहम्मद उनके सेवक हैं। उस रात के आतंकी हमले में अकेला जीवित बचे इस आतंकी अब्देसलाम को कोर्ट रूम में कांच के बंद कमरे में सबसे पहले पेश किया गया। सुनवाई के दौरान 1800 गवाह और 300 से अधिक वकील भी मौजूद रहे। सुनवाई करीब एक घंटे की देरी से शुरू हुई लेकिन इसकी वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।

उस रात के आतंकी हमलावरों में से अकेला जीवित बचा अब्देसलाम पर ही हत्या का आरोप है। बीस आरोपितों में से छह मौजूद नहीं हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा है। अब्देसलाम ने उत्तरी पेरिस में अपनी रेंटल कार छोड़ दी थी और अपने घर ब्रुसेल्स भागने से पहले आत्मघाती हमले को साजिश के अनुरूप अंजाम नहीं दे पाया था।

उसने अभी तक हमले के संबंध में जांचकर्ताओं को कुछ भी नहीं बताया है लेकिन वह जानता है कि हमले की साजिश किसकी थी। पहली बार पीडि़त भी हमले की सुनवाई को एक सुरक्षित आडियो लिंक के जरिये अपने घरों में बैठकर सुन रहे हैं। यह सुनवाई पिछले नौ महीनों से निर्धारित है। 


प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस की खुफिया शाखा ने आतंकी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) से जुड़े रिजवान रफीक (Rezwan Rafiquee)  को गिरफ्तार किया है। उस पर मार्च में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान ढाका में हिंसा भड़काने का आरोप है।

खुफिया शाखा के अतिरिक्त आयुक्त एकेएम हाफिज अख्तर (A.K.M. Hafiz Akhter)  ने बताया कि रफीक को शुक्रवार की रात मुग्दा (Mugda) इलाके से गिरफ्तार किया गया है। ढाका में 26 मार्च को हुई हिंसा के सिलसिले में उसके खिलाफ पलटन थाने (Paltan Police Station) में मुकदमा दर्ज किया गया था। वह पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे का विरोध कर रहा था। अख्तर ने बताया कि रिजवान ने फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर  भड़काऊ पोस्ट साझा की थी और दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर भी उसने आतंकी संगठनों के शीर्ष सरगनाओं का समर्थन किया था।


इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश का दो दिवसीय दौरा किया। कोरोना काल शुरू होने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा रही। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह के जश्न में भी शामिल हुए। इस अवसर पर ढाका में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, दोनों देशों की साझी विरासतों और साझा लक्ष्यों पर विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका, भारतीय सैनिकों के बलिदान और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया।


इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और नरसंहार का जिक्र कर कहा कि उन अत्याचारों और दमन की दुनिया में उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए। दोनों देशों के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं और हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है, हमारे लक्ष्य भी साझे हैं और हमारी चुनौतियां भी साझा हैं। व्यापार और उद्योग में हमारे सामने एक जैसी संभावनाएं हैं तो आतंकवाद जैसे समान खतरे भी हैं।