काबुल ब्लास्ट में राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस आतंकवादी संगठन को ठहराया जिम्मेदार

काबुल ब्लास्ट में राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस आतंकवादी संगठन को ठहराया जिम्मेदार

काबुल. अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक स्कूल के पास शनिवार को हुए विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है. इसकी जानकारी एक ऑफिसर ने दी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के प्रतिनिधि तारिक अरियान के मुताबिक, इसमें घायल हुए 55 लोगों को कई हॉस्पिटल ों में भर्ती कराया गया है. अरियान ने बोला कि इस घटना का शिकार लगभग सभी नागरिक हुए हैं लेकिन घायलों में अधिकांश छात्राएं हैं. यह धमाका अफगान राजधानी के एक शिया-हजारा आबादी वाले इलाके के पास बने स्कूल दश्त-ए-बार्ची के पास शाम 4.27 बजे हुआ था.

धमाके की वजह का पता नहीं
अरियान ने बोला कि क्षेत्र को पुलिस द्वारा अधिक जानकारी दिए बगैर ही क्षेत्र को बंद कर दिया गया है. अभी तक धमाके की वजह का पता नहीं चल सका है. इस धमाके की असल वजह का अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन कुछ लोकल मीडिया के मुताबिक यह धमाका रॉकेट की वजह से हुआ, जबकि अन्य रिपोर्ट के अनुसार यह विस्फोट कार बम के कारण हुआ. टेलीविजन पर आ रही तस्वीरों में यहां-वहां पड़े स्कूल बैग और जली हुई गाडिय़ां और खून से सनी हुई स्कूली किताबें और लोग अपने संबंधियों को खोजते नजर आ रहे हैं.

53 लोगों के मरने की संभावना
एक गैर-सरकारी संगठन, इमरजेंसी ने ट्विटर हैंडल से लिखा है कि मरने वाले एक इंसान और घायल हुए 26 लोगों को काबुल के हॉस्पिटल लाया गया. इसमें बोला गया है कि घायलों में अधिकांश 12 से 20 वर्ष की लड़कियां थीं. संभावना जताई जा रही है कि विस्फोट में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है. पत्रकार बिलाल सरवरी ने ट्विटर हैंडल से लिखा है कि कम से कम 53 लोग मारे गए हैं और 150 से अधिक घायल हुए हैं. घटना के बाद, नागरिकों की मर्डर की निंदा करने के लिए कई लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया.

किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
अभी तक किसी भी समूह ने विस्फोट की जिम्मेदारी नहीं ली है. तालिबान और इस्लामिक स्टेट दोनों आतंकी समूह अफगानिस्तान में सक्रिय हैं. तालिबान ने घटना में शामिल होने से मना किया है. हालांकि, आंतरिक मंत्रालय के प्रतिनिधि ने ट्विटर हैंडल से लिखा है कि हमले के पीछे निस्संदेह तालिबान था. राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भी तालिबान को दोषी ठहराया. समूह ने फिर से दिखाया कि यह न केवल शांतिपूर्ण तरीका से संकट को हल करने के लिए अनिच्छुक है, बल्कि शांति प्रक्रिया पूरी तरह से बेकार कर देना चाहता है.

अफगान सरकार कर रही है शांति वार्ता
अफगान सरकार पिछले वर्ष के सितंबर से तालिबान के साथ शांति बातचीत कर रही है, लेकिन ये ठप हो गई है. अफगानिस्तान में अमेरिका के राजदूत रॉस विल्सन ने एक ट्वीट में हमले को 'घृणास्पद' बताया. उन्होंने हमले को 'अक्षम्य' और 'अफगानिस्तान के भविष्य पर हमला' बताया.


नेपाल में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, तमाकोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए जारी हुई चेतावनी

नेपाल में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, तमाकोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए जारी हुई चेतावनी

नेपाल में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, डोलखा जिला प्रशासन (Dolakha district) ने तमाकोशी नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की है। भूस्खलन ने रोंगक्सिया शहर (RongXia city) टिंगरी काउंटी (Tingri County)के पास नदी प्रणाली को क्षतिग्रस्त कर दिया है। यह अचानक बाढ़ का कारण बन सकता है।

बाढ़ में 11 लोगों की मौत, 25 लोग लापता

बता दें कि सिंधुपालचोक जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ ने 11 लोगों की जान ले ली है। वहीं, 25 लोगों के लापता हो चुके हैं। मृतकों में एक भारतीय और दो चीनी नागरिक शामिल हैं। तीनों मृतक विदेशी नागरिक हैं और ये एक चीन की कंपनी के लिए काम कर रहे थे।

जिला प्रशासन के मुताबिक तीनों मृतक इलाके में चल रही एक विकास परियोजना में श्रमिक के तौर पर काम कर रहे थे। मृतकों के शव जिले के मेलमची शहर के पास बरामद किए गए थे। इलाके में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया था। जिला अधिकारी बाबूराम खनाल के मुताबिक, तीनों मृतक विदेशी नागरिक थे और ये एक चीन की कंपनी के लिए काम कर रहे थे। जो पेयजल परियोजना के तहत काम पर लगी है।

वहीं नेपाल के गृह मंत्रालय ने गुरुवार देर रात पुष्टी की है कि, चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा से लगे पहाड़ी जिले सिंधुपालचोक और देश के अन्य हिस्सों में आई बाढ़ में 25 लोग लापता हैं। गौरतलब है कि नेपाल में आमतौर पर मानसून की बारिश जून के महीने में शुरू होती है और सितंबर के आखिरी तक चलती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में हर साल बारिश के महीनों में हजारों लोगों की मौत होती है।


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