नैंसी पेलोसी के भाषण और भाव-भंगिमाओं ने चीनी गुस्से की आग में डाल दिया है घी

नैंसी पेलोसी के भाषण और भाव-भंगिमाओं ने चीनी गुस्से की आग में डाल दिया है घी

हम आपको बता दें कि 1997 के बाद यह पहला मौका है जब कोई बड़ा अमेरिकी नेता ताइवान की यात्रा पर आया है. अभी पिछले हफ्ते ही चीनी राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति की वार्ता के दौरान भी चीन ने पेलोसी की ताइवान यात्रा का विरोध किया था.

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा से चीन बिलबिला उठा है लेकिन पेलोसी ने घोषणा कर दिया है कि अभी कई अमेरिकी नेता ताइवान के दौरे पर आएंगे. चीन ने नैंसी पेलोसी की यात्रा को बाधित करने की पूरी प्रयास की लेकिन पेलोसी भी पूरी तैयारी के साथ आई थीं. नैंसी पेलोसी की यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका ने अभेद्य सुरक्षा चक्र बनाये थे जिसे चीन नहीं तोड़ सका. चीन ने अपने लड़ाकू विमान भेज कर उसकी गड़गड़ाहट से डराना चाहा, चीन ने ताइवान पर साइबर हमले किये लेकिन यह कोई भी कोशिश काम नहीं आया तो ड्रैगन बौखला उठा है.

हम आपको बता दें कि 1997 के बाद यह पहला मौका है जब कोई बड़ा अमेरिकी नेता ताइवान की यात्रा पर आया है. अभी पिछले हफ्ते ही चीनी राष्ट्रपति और अमेरिकी राष्ट्रपति की वार्ता के दौरान भी चीन ने पेलोसी की ताइवान यात्रा का विरोध किया था और अंजाम भुगतने तक की चेतावनी दी थी लेकिन अमेरिका पर कोई फर्क नहीं पड़ा. चीनी धमकियों को नजरअंदाज करते हुए पेलोसी ताइवान पहुँचीं और बोला कि हमें हंगामे से कोई फर्क नहीं पड़ता. यही नहीं पेलोसी की ताइवान यात्रा के दौरान जो फोटोज़ सामने आई हैं उसमें उनकी रेट भंगिमाएं देखकर चीन गुस्से से उबल रहा है. चीन की बात करते समय बार-बार पेलोसी जिस तरह मुट्ठी भींच रही थीं उसको देख कर चीन गुस्से से पागल हो गया है. नैंसी पेलोसी के ताइवान पहुँचने पर जनता ने जिस तरह उनका स्वागत किया उसको देखकर भी चीन को मिर्ची लगी है. यही नहीं ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने नैंसी पेलोसी को ताइवान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जोकि ड्रैगन को नागवार गुजरा है.

नैंसी पेलोसी ने ताइवानी संसद को संबोधित किया जिसके कुछ घंटों बाद ही ड्रैगन ने बीजिंग में अमेरिकी राजदूत को तलब कर अपनी नाराजगी प्रकट कर दी और वाशिंगटन को धमकी दी है कि उसे अपनी ‘गलतियों’ की ‘कीमत चुकानी होगी.’ पेलोसी ने अपने संबोधन में बोला कि ‘आज दुनिया में लोकतंत्र और निरंकुशता के बीच संघर्ष है. पेलोसी ने बोला कि अमेरिका कभी भी जोर-जबरदस्ती के दम पर ताइवान को दबाने नहीं देगा. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने हमेशा ताइवान के साथ खड़े रहने का वादा किया है.’ लेकिन अमेरिका के इस वादे से चीन आग बबूला हो गया है. चीन ने चेतावनी दी है कि उसकी चेतावनियों के बावजूद हो रही अमेरिकी प्रतिनिधिसभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा का द्विपक्षीय संबंधों पर ‘गंभीर असर’ पड़ेगा क्योंकि यह क्षेत्र की शांति और स्थिरता को ‘गंभीर रूप से कमजोर’ करता है. चीनी सरकारी मीडिया ने बोला कि सेना उनकी यात्रा का मुकाबला करने के लिए ‘लक्षित’ अभियान चलाएगी. चीन ने राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराते हुए बोला कि पेलोसी की यात्रा ‘एक चीन सिद्धांत’ का उल्लंघन करती है. उसने अमेरिका पर उसे नियंत्रित करने के लिए ताइवान कार्ड खेलने का आरोप लगाया.

उल्लेखनीय है कि चीन ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है और कहता है कि वह उसे अपने में मिलाएगा. चीन विदेश मंत्रालय के बयान में बोला गया है कि ताइवान का समस्या चीन का आंतरिक मामला है और किसी भी अन्य राष्ट्र को यह अधिकार नहीं है कि वह ताइवान के मसले पर न्यायाधीश बनकर काम करे. विदेश मंत्रालय ने कहा, ”चीन अमेरिका से ‘ताइवान कार्ड’ खेलना और चीन को नियंत्रित करने के लिए ताइवान का इस्तेमाल बंद करने का आग्रह करता है. बयान में बोला गया है कि अमेरिका को ताइवान में दखल देना और चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना बंद कर देना चाहिए.” चीन ने बोला कि दुनिया में सिर्फ एक-चीन है, ताइवान चीन के क्षेत्र का एक अविभाज्य हिस्सा है, और पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की गवर्नमेंट पूरे चीन का अगुवाई करने वाली एकमात्र कानूनी गवर्नमेंट है.

इस बीच, चीनी धमकियों से अमेरिका बेपरवाह नजर आ रहा है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सेना गतिविधियों के बीच अमेरिका और इंडोनेशिया ने आपसी संबंधों के और मजबूत होने का संकेत देते हुए आज से सुमात्रा द्वीप में वार्षिक संयुक्त सेना अभ्यास प्रारम्भ किया, जिसमें पहली बार अन्य राष्ट्रों ने भी भाग लिया. जकार्ता में अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में बताया कि इस वर्ष इस सेना अभ्यास में अमेरिका, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, जापान और सिंगापुर के 5,000 से अधिक जवान हिस्सा ले रहे हैं.

वहीं उत्तर में चीन ने घोषणा किया है कि उसकी सेना ताइवान के आपसपास के जलक्षेत्र में बृहस्पतिवार से रविवार तक सेना अभ्यास करेगी. सरकारी ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने बताया कि चीनी सेना “ताइवान द्वीप पर पेलोसी की यात्रा का मुकाबला करने के लिए लक्षित सेना अभियानों की एक श्रृंखला प्रारम्भ करेगी और देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेगी.” चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की पूर्वी सिनेमाघर कमान ताइवान द्वीप के आसपास संयुक्त सेना अभियानों की एक श्रृंखला भी प्रारम्भ कर चुकी है. हम आपको बता दें कि नैंसी पेलोसी के ताइवान पहुंचने से कुछ समय पहले, चीन के सरकारी मीडिया ने बोला था कि चीनी एसयू-35 लड़ाकू जेट ताइवान जलडमरूमध्य को “पार” कर रहे हैं. यही नहीं कुछ हैकर्स ने ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर एक साइबर हमला किया, जिससे यह मंगलवार शाम अस्थायी रूप से अनुपलब्ध हो गई थी. राष्ट्रपति कार्यालय ने बोला कि हमले के तुरंत बाद वेबसाइट को बहाल कर दिया गया था.

तो इस तरह ड्रैगन तिलमिलाया हुआ है. विस्तारवादी राष्ट्र चीन इस समय ताइवान को डराने धमकाने में लगा हुआ है. नैंसी पेलोसी तो अपनी यात्रा कर चली गयी हैं लेकिन ताइवान पर अब चीनी दबाव बढ़ने का अंदेशा है. देखना होगा कि अमेरिका और अन्य राष्ट्र ताइवान का कितना साथ देते हैं क्योंकि इसी वर्ष यूक्रेन का उदाहरण भी सामने है जिसने अमेरिका और नाटो राष्ट्रों के बल पर रूस से पंगा ले लिया और युद्ध अब तक खत्म नहीं हुआ है.