उत्तर कोरिया के खतरनाक इरादे, यूरेनियम संवर्धन प्लांट का कर रहा है विस्तार

उत्तर कोरिया के खतरनाक इरादे, यूरेनियम संवर्धन प्लांट का कर रहा है विस्तार

हाल के उपग्रह चित्रों से पता चला है कि उत्तर कोरिया योंगबयोन परमाणु कांप्लेक्स में यूरेनियम संवर्धन प्लांट का विस्तार करने जा रहा है। इससे बम बनाने वाली सामग्री का उत्पादन बढ़ाने के उसके इरादे का पता चलता है। यह आकलन उत्तर कोरिया द्वारा हाल में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ लंबे समय से निष्क्रिय परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता के बीच छह महीने में अपने पहले मिसाइल परीक्षणों के साथ तनाव बढ़ाने के बाद आया है।

मोंटेरी के मिडलबरी इंस्टीट्यूट आफ इंटरनेशनल स्टडीज के जेफरी लेविस एवं दो अन्य विशेषज्ञों ने एक रिपोर्ट में कहा है, 'संवर्धन प्लांट का विस्तार संकेत देता है कि उत्तर कोरिया योंगबयोन साइट पर हथियार श्रेणी के यूरेनियम के उत्पादन में करीब 25 फीसद वृद्धि करना चाहता है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि मैक्सर द्वारा लिए गए उपग्रह चित्र से योंगबयोन में यूरेनियम संवर्धन प्लांट के आसपास के क्षेत्र में निर्माण गतिविधि का पता चलता है।

उपग्रह चित्र एक सितंबर को लिए गए हैं। इसमें दिख रहा है कि उत्तर कोरिया पेड़ों को काट रहा है और निर्माण के लिए जमीन तैयार करने में जुटा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 सितंबर को ली गई एक दूसरी छवि में क्षेत्र को घेरने के लिए एक दीवार खड़ी की गई थी। एक नींव पर काम किया गया था और नए संलग्न क्षेत्र तक पहुंच प्रदान करने के लिए संवर्धन भवन के किनारे से पैनल हटा दिए गए थे।

ज्ञात हो कि उत्तर कोरिया ने पिछले बुधवार को जिन दो बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है, उन्हें पहली बार ट्रेन को लांच पैड बनाकर दागा गया। इससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है। इसके कुछ घंटों बाद ही दक्षिण कोरिया ने भी पनडुब्बी से पानी के अंदर मिसाइल का परीक्षण किया था। इससे कोरिया प्रायद्वीप में एक बार फिर हथियारों की दौड़ तेज हो रही है।


CPEC की मुश्किलों को लेकर गंभीर नहीं पाकिस्तान? चीनी निवेशकों के भागने का खतरा बढ़ा

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इस्लामाबाद
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की पहले चरण के प्रॉजेक्ट्स पर अब भी ग्रहण के बादल लगे हुए हैं. इमरान खान सरकार अब तक चाइना की कंपनियों और निवेशकों के साथ प्रॉजेक्ट्स में आ रही अड़चनों को दूर नहीं कर पाई है. परियोजनाओं में हो रही देरी के बाद अब पूरे पर ही सवालिया निशान लगने लगा है. हाल में ही पाक चाइना रिलेशन स्टियरिंग कमेटी की मीटिंग आयोजित की गई थी. इसमें पाया गया कि पाक सरकार ने अधिकतर दिशा-निर्देशों को लागू नहीं किया है.


बिजली परियोजनाओं के लिए खड़ी हुई मुश्किलें
इस मीटिंग में पाक का अगुवाई फेडरल मिनिस्टर ऑफ प्लानिंग, डेवलपमेंट एंड स्पेशल इनिशिएटिव असद उमर ने की थी. बुधवार को हुई मीटिंग में शामिल लोगों के मुताबिक, पाक के ऊर्जा मंत्रालय ने संचालन समिति के दिए गए आदेशों को अबतक लागू नहीं किया है. अपनी पिछली मीटिंग में पाक सरकार ने 3,600 मेगावाट की उत्पादन क्षमता वाली पांच सीपीईसी बिजली परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन प्रारम्भ करने में देरी से निपटने के लिए एक नीति तैयार करने के लिए पावर डिवीजन के लिए अगस्त के अंत की समय सीमा तय की थी.




अब अगली मीटिंग में होगा अंतिम फैसला
ऊर्जा मंत्रालय को इस मामले को हल करने के लिए ऊर्जा पर कैबिनेट समिति को नीति प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था. पाकिस्तानी योजना मंत्रालय के बयान में बताया गया है कि बिजली विभाग ने समिति को सूचित किया कि छह बिजली परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन की दिनांक के विस्तार का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं. अब इसे लेकर अगली मीटिंग में कोई फैसला लिया जा सकता है.




सीपीईसी बना चाइना के गले की फांस
चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर अब ड्रैगन के गले की फांस बन गया है. अरबों का पैसा लगाने के बाद भी चाइना को वह लाभ नहीं मिल रहा है जिसके लिए उसने 60 अरब US डॉलर का निवेश किया था. पाक में इसे लेकर पॉलिटिक्स भी चरम पर है. वहीं करप्शन में डूबे पाकिस्तानी नेता सड़क निर्माण काम में कोताही भी बरत रहे हैं.