तालिबान की वापसी के साथ पाकिस्‍तानी सेना में बड़ा फेरबदल

तालिबान की वापसी के साथ पाकिस्‍तानी सेना में बड़ा फेरबदल

अफगानिस्‍तान में तालिबान की हुकूमत कायम होने के साथ ही पाकिस्‍तानी सेना में भी सरगर्मी बढ़ गई है। पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा यानी एलओसी की जिम्मेदारी संभालने वाले लेफ्टिनेंट जनरल अजहर अब्बास को प्रमोट करते हुए उसे अगला 'चीफ आफ जनरल स्टाफ' नियुक्‍त कर दिया है। सेना में बड़े स्तर पर हुए इस फेरबदल को काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंकि चीफ आफ जनरल स्टाफ का पद सेना प्रमुख के बाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल अब्बास बलूच रेजिमेंट से हैं। पाकिस्तानी सेना की मीडिया इकाई अंतर सेवा जनसंपर्क (आईएसपीआर) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, वह लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा का स्थान लेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को रावलपिंडी स्थित 10 कोर का प्रमुख बनाया गया है। मिर्जा से पहले अब्बास 10 कोर का नेतृत्व कर रहे थे। मालूम हो कि रावलपिंडी कोर ही नियंत्रण रेखा पर पाकिस्‍तान की ओर से तैनात रहती है।

पाकिस्‍तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना में सेना प्रमुख के बाद चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) का पद सबसे महत्‍वपूर्ण होता है। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ को जनरल हेडक्वार्टर्स में खुफिया, तैनाती और परिचालन संबंधी कामकाज देखना होता है। यही नहीं, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के मातहत ही पाकिस्‍तानी मिलिट्री ऑपरेशन्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस निदेशालय काम करते हैं। गौर करने वाली बात यह भी कि लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद चिराग हैदर को मुल्तान कोर का प्रमुख बनाया गया है।


मुल्तान कोर पाकिस्तान की मुख स्ट्राइक कोर में से एक है। समाचार एजेंसी पीटीआइ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वैसे तो सेना में तबादले और पोस्टिंग एक रूटीन मामला है, लेकिन पाकिस्‍तान के अंतरराष्ट्रीय और घरेलू मामलों में सेना की दखलंदाजी के चलते दुनिया भर में इस पर बारीक नजर रखी जाती है। खासकर ऐसे वक्‍त में यह बदलाव बेहद मायने रखता है जब अफगानिस्‍तान में तालिबान की वापसी हो गई है। गौर करें तो पाते हैं कि हाल ही में भारतीय खुफिया एजेंसियों की ओर से आतंकी हमलों और घुसपैठ को लेकर अलर्ट जारी किया गया था।


प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस की खुफिया शाखा ने आतंकी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) से जुड़े रिजवान रफीक (Rezwan Rafiquee)  को गिरफ्तार किया है। उस पर मार्च में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान ढाका में हिंसा भड़काने का आरोप है।

खुफिया शाखा के अतिरिक्त आयुक्त एकेएम हाफिज अख्तर (A.K.M. Hafiz Akhter)  ने बताया कि रफीक को शुक्रवार की रात मुग्दा (Mugda) इलाके से गिरफ्तार किया गया है। ढाका में 26 मार्च को हुई हिंसा के सिलसिले में उसके खिलाफ पलटन थाने (Paltan Police Station) में मुकदमा दर्ज किया गया था। वह पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे का विरोध कर रहा था। अख्तर ने बताया कि रिजवान ने फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर  भड़काऊ पोस्ट साझा की थी और दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर भी उसने आतंकी संगठनों के शीर्ष सरगनाओं का समर्थन किया था।


इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश का दो दिवसीय दौरा किया। कोरोना काल शुरू होने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा रही। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह के जश्न में भी शामिल हुए। इस अवसर पर ढाका में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, दोनों देशों की साझी विरासतों और साझा लक्ष्यों पर विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका, भारतीय सैनिकों के बलिदान और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया।


इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और नरसंहार का जिक्र कर कहा कि उन अत्याचारों और दमन की दुनिया में उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए। दोनों देशों के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं और हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है, हमारे लक्ष्य भी साझे हैं और हमारी चुनौतियां भी साझा हैं। व्यापार और उद्योग में हमारे सामने एक जैसी संभावनाएं हैं तो आतंकवाद जैसे समान खतरे भी हैं।