Google Photo के लिए आया Handy Tool, बचा स्पेस और समय ऐसे करें चेक

Google Photo के लिए आया Handy Tool, बचा स्पेस और समय ऐसे करें चेक
गूगल (Google) ने इस महीने अपने फोटो ऐप (Photo App) में बड़े परिवर्तन का ऐलान कर यूजर्स को चौंका दिया था गूगल ने अपने ऐलान में बोला था कि 1 जून 2021 से गूगल फोटोज (Google Photos) में हाई क्वालिटी फोटोज (High Quality Photos) के लिए फ्री स्टोरेज सपोर्ट (Free Storage Support) को खत्म किया जा रहा है कंपनी के मुताबिक, 1 जून से ऐप में बैकअप होने वाले फोटो और वीडियो गूगल एकाउंट (Google Account) के साथ आने वाली फ्री 15जीबी स्टोरेज में ऐड किया जाएगा

कंपनी के मुताबिक, यूजर्स को इस 15जीबी स्टोरेज को भरने में कई वर्ष लगेंगे वहीं, कंपनी ने एक हैंडी टूल (Handy Tool) बनाया है इस टूल की सहायता से यूजर्स वर्ष या महीने में बचे फ्री स्टोरेज और समय को चेक कर सकते हैं आइए जानते हैं कैसे करें इस हैंडी टूल का इस्तेमाल गूगल फोटो एप पर स्टोरेज और समय चेक करने के लिए आपको photos.google.com साइट पर जाकर अपना गूगल एकाउंट लॉग इन करना होगा

इस पर आपको एक छोटा सा ग्राफ दिखाई देगा जिसमें गूगल फोटो एप में स्पेस और समय की जानकारी मिलेगी यदि आप इसकी पूरी जानकारी लेना चाहते हैं तो निम्नलिखित स्टेप को अनुसरण करें
स्टेप-1. किसी भी ब्राउजर से https://myaccount.google.कॉम साइट पर जाएं

स्टेप-2. इसके बाद अपना गूगल एकाउंट लॉन इन करें

स्टेप-3. एकाउंट स्टोरेज ऑप्शन पर जाकर Manage Storage पर क्लिक करें

स्टेप-4. इसके बाद आपको एक कलर कॉडेड ग्राफ दिखेगा में जिसमें आपको 15 जीबी स्टोरेज के स्पेस और समय की पूरी जानकारी मिलेगी

स्टेप-5. इस ग्राफ में तीन रंग में तीन ऑप्शन नजर आएंगे यानि नीला रंग- गूगल ड्राइव, लाल रंग- जीमेल- और पीला रंग- गूगल फोटो में स्टोरेज खपत को दिखाएगा इन तीनों ऑप्शन के सामने आपको एक रिडायरेक्ट लिंक आइकन दिखेगा जिस पर क्लिक करने से आप इससे संबंधित वेबसाइट पर जाकर कुछ अनावश्यक डेटा डिलीट कर कुछ एप को स्पेस फ्री कर सकते हैं

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई शिक्षा नीति पर अमल को सरकार दे सकती है अलग से फंड, शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया है प्रस्ताव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर सरकार जिस तरह से पूरी ताकत से जुटी है, उससे साफ है कि इसे आगे बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से बजट में अलग से वित्तीय प्रविधान किए जा सकते हैं। शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर वित्त मंत्रालय को एक प्रजेंटेशन भी दिया है। इसमें नीति के अमल से जुड़ी जरूरतों को प्रमुखता से रखा गया है। वैसे भी देश की आजादी के 75वें साल यानी वर्ष 2022 में जिस तरह स्कूली बच्चों को नई नीति के तहत किताबें मुहैया कराने जैसे लक्ष्य रखे गए हैं, उसमें ज्यादा जरूरत पैसों की होगी।

खास बात यह है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार से शिक्षा पर खर्च को दोगुना करने की सिफारिश की गई है। नीति में साफ कहा गया है कि शिक्षा को नई ऊंचाई देने और नीति के अमल के लिए जरूरी है कि शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च का बीस फीसद राशि खर्च की जाए। जो मौजूदा समय में कुल सरकारी खर्च का सिर्फ दस फीसद ही है।

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की मानें, तो नीति में भले ही शिक्षा पर खर्च में दोगुनी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है, लेकिन यह मौजूदा परिस्थितियों में एक साथ करना संभव नहीं है। यह जरूर है कि यह बढ़ोतरी आने वाले सालों में एक क्रमबद्ध तरीके से की जा सकती है। इसकी शुरुआत सरकार की ओर से इसी साल से की जा सकती है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर वैसे तो शिक्षा मंत्रालय ने दो क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें एक क्षेत्र ऐसा है, जिनमें उन सारी गतिविधियों को शामिल किया गया है, जिनके अमल के लिए पैसों की कोई जरूरत नहीं होगी। बल्कि इन्हें मंत्रालय के स्तर पर प्रशासनिक तरीके से अंजाम दिया जाना है। जबकि दूसरे क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को रखा है, जिसके लिए पैसों की जरूरत होगी।


फिलहाल इनमें जो अमल है, उनमें स्कूली बच्चों को खाने के साथ नाश्ता भी देना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना, स्कूली शिक्षा में प्री-स्कूल को शामिल करना, शिक्षकों के खाली पदों को भरना, शोध को बढ़ावा देना, उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने सहित ऑनलाइन शिक्षा को मजबूती देने जैसे कदम शामिल हैं।

सरकार इस बार शिक्षा नीति के अमल को लेकर कुछ सतर्क भी है, क्योंकि इससे पहले जो नीति बनाई गई, उस पर पैसों के अभाव में ठीक से अमल नहीं हो सका था। हरेक नीति में शिक्षा पर जीडीपी का छह फीसद तक खर्च करने की सिफारिश की गई, लेकिन अभी भी शिक्षा पर जीडीपी के चार फीसद के आसपास खर्च किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शिक्षा का कुल बजट करीब एक लाख करोड़ रुपये था।


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